*चैत्रीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं*। नवरात्र में शक्ति साधना व कृपा प्राप्ति की सरल पाठ विधि क्या है? नवरात्र का महत्व;-
🌹एक वर्ष में चार प्रकार के नवरात्र होते हैं। इनमें से आषाढ़ और माघ की प्रतिपदा से शुरू होने वाले नवरात्र गुप्त होते हैं। इसमें देवी अपनी शक्तियों का अर्जन करती हैं। इस दौरान देवी साधक गुप्त रूप से देवी की उपासना कर अभीष्ट मंत्र सिद्धि करते हैं। चैत्र और आश्विन मास के नवरात्र खुले नवरात्र होते हैं। इसमें साधकों के साथ ही देवी भक्त भी देवी की उपासना करते हैं। 2-‘नव’ के दो अर्थ हैं– ‘ नया ‘ एवं ‘ नौ’. रात्रि का अर्थ है रात, जो हमें आराम और शांति देती है। यह नौ दिन समय है स्वयं के स्वरूप को पहचानने का और अपने स्रोत की ओर वापस जाने का। इस परिवर्तन के काल में प्रकृति पुराने को त्यागकर फिर से वसंत काल में नया रूप सृजन करती है। 3-नवरात्र शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है- नव और रात्र। नव का अर्थ है नौ और रात्र शब्द में पुनः दो शब्द निहित हैं: रा+त्रि। रा का अर्थ है रात और त्रि का अर्थ है जीवन के तीन पहलू- शरीर, मन और आत्मा। 4-इंसान को तीन तरह की समस्याएं घेर सकती हैं- भौतिक, मानसिक और आध्यात्मिक। इन समस्याओं से जो छुटकारा दिलाती है वह रात्रि है। रात्रि या रात आपको दुख से मुक्ति दिलाकर आपके जीवन में सुख लाती है। इंसान कैसी भी परिस्थिति में हो, रात में सबको आराम मिलता है। रात की गोद में सब अपने सुख-दुख किनारे रखकर सो जाते हैं। 5-चूंकि यहां रात गिनते हैं इसलिए इसे नवरात्र यानि नौ रातों का समूह कहा जाता है। रूपक के द्वारा हमारे शरीर को नौ मुख्य द्वारों वाला कहा गया है और, इसके भीतर निवास करने वाली जीवनी शक्ति का नाम ही दुर्गा देवी है। 6-इन मुख्य इन्द्रियों में अनुशासन, स्वच्छ्ता, तारतम्य स्थापित करने के प्रतीक रूप में, शरीर तंत्र को पूरे साल के लिए सुचारू रूप से क्रियाशील रखने के लिए नौ द्वारों की शुद्धि का पर्व नौ दिन मनाया जाता है। इनको व्यक्तिगत रूप से महत्व देने के लिए नौ दिन, नौ दुर्गाओं के लिए कहे जाते हैं। 7-जैसे एक नवजात जन्म लेने से पहले अपनी मां के गर्भ में नौ महीने व्यतीत करता है उसी तरह एक साधक भी इन नौ दिनों और रातों मे उपवास, प्रार्थना, मौन और ध्यान के द्वारा अपने सच्चे स्रोत की ओर वापस आता है। 8-नवरात्रि के इन नौ दिनों के दौरान मन को दिव्य चेतना मे लिप्त रखना चाहिए। अपने अन्दर ये जिज्ञासा जगाइये, ” मेरा जन्म कैसे हुआ? मेरा स्रोत क्या है ? “तब हम सृजनात्मक और विजयी बनते हैं। 9-नवरात्रि के नौ दिनों मे तीन-तीन दिन तीन गुणों के अनुरूप है- तमस, रजस और सत्व। हमारा जीवन इन तीन गुणों पर ही चलता है फिर भी हम इसके बारे में सजग नहीं रहते और इस पर विचार भी नहीं करते। हमारी चेतना, तमस और रजस के बीच बहते हुए अंत के तीन दिनों में सत्व गुण में प्रस्फुटित होती है। 10-इन आदि तीन -गुणों को इस दैदीप्यमान ब्रह्माण्ड की नारी शक्ति माना गया है। नवरात्री के दौरान मातृ रुपी दिव्यता की आराधना से हम तीनों गुणों को संतुलित करके वातावरण मैं सत्व की वृद्धि करते हैं। जब सत्व गुण बढ़ता है तब विजय की प्राप्ति होती है।नवरात्रि के अंत पर हम विजयदशमी का उत्सव मनाते है। यह दिन जागी हुई दिव्य चेतना में परिणित होने का है। 11-नवरात्रि के नौ दिनों में यज्ञ और हवन का सिलसिला चलता रहता है। ये यज्ञ संसार में दुख और दर्द के हर तरह के प्रभाव को दूर कर देते हैं। नवरात्रि के हर दिन का अपना महत्व और प्रभाव है और उस दिन के अनुरूप ही यज्ञ और हवन किए जाते हैं। जीवन में हमेंअच्छे और बुरे दोनों तरह के गुण प्रभावित करते हैं। 12-नौ दिन तक चलने वाले पर्व नवरात्रि के तीन-तीन दिन तीन देवियों को समर्पित होते हैं। ये तीन देवियां हैं- मां दुर्गा (शौर्य की देवी), मां लक्ष्मी (धन की देवी) और मां सरस्वती (ज्ञान की देवी)। 13-नवरात्र हमें यह सिखाते हैं कि किस तरह इंसान अपने अंदर की मूलभूत अच्छाइयों से नकारात्मकता पर विजय प्राप्त कर सकता है और स्वयम् केअलौकिक स्वरूप से साक्षात्कार कर सकता है। जिस तरह मां के गर्भ में नौ महीने पलने के बाद ही एक जीव का निर्माण होता है ठीक वैसे ही ये नौ दिन हमें अपने मूल रूप, अपनी जड़ों तक वापस ले जाने में अहम भूमिका अदा करते हैं। इन नौ दिनों का ध्यान, सत्संग, शांति और ज्ञान प्राप्ति के लिए उपयोग करना चाहिए। नवरात्र में धर्म अर्थ काम और मोक्ष प्राप्ति के साधन;- 03 FACTS;- 1-नवरात्र में शक्ति साधना व कृपा प्राप्ति का सरल उपाय दुर्गा सप्तशती का पाठ है।दुर्गा सप्तशती महर्षि वेदव्यास रचित मार्कण्डेय पुराण के सावर्णि मन्वतर के देवी महात्म्य के 700 श्लोक का एक भाग है। दुर्गा सप्तशती में अध्याय एक से तेरह तक तीन चरित्र विभाग हैं। इसमें 700 श्लोक हैं। 2-दुर्गा सप्तशती के छह अंग तेरह अध्याय को छोड़कर हैं। कवच, कीलक, अर्गला दुर्गा सप्तशती के प्रथम तीन अंग और प्रधानिक आदि तीन रहस्य हैं। दुर्गा-सप्तशती को दुर्गा-पाठ, चंडी-पाठ से भी संबोधित करते हैं।दुर्गा- सप्तशती के पाठ के कई विधि विधान है।इस संदर्भ में विद्वानों में मतांतर है। 3-श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ मनोरथ सिद्धि के लिए किया जाता है; क्योंकि श्री दुर्गा सप्तशती दैत्यों के संहार की शौर्य गाथा से अधिक कर्म, भक्ति एवं ज्ञान की त्रिवेणी हैं। यह श्री मार्कण्डेय पुराण का अंश है। यह देवी महात्म्य धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष चारों पुरुषार्थों को प्रदान करने में सक्षम है। सप्तशती में कुछ ऐसे भी स्तोत्र एवं मंत्र हैं, जिनके विधिवत पारायण से इच्छित मनोकामना की पूर्ति होती है। ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;; सिद्ध कुंजिका स्तोत्र की महिमा(एक पाठ से संपूर्ण दुर्गा सप्तशती जैसा फल);- 07 FACTS;- 1-श्री दुर्गा सप्तशती में से एक ऐसा पाठ हैं, जिसके करने से आपकी सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी। इस पाठ को करने के बाद आपको किसी अन्य पाठ की आवश्यकता नहीं होगी।यह पाठ है..सिद्धकुंजिकास्तोत्रम्। 2-समस्त बाधाओं को शांत करने, शत्रु दमन, ऋण मुक्ति, करियर, विद्या, शारीरिक और मानसिक सुख प्राप्त करना चाहते हैं तो सिद्धकुंजिकास्तोत्र का पाठ अवश्य करें। श्री दुर्गा सप्तशती में यह अध्याय सम्मिलित है। यदि समय कम है तो आप इसका पाठ करके भी श्रीदुर्गा सप्तशती के संपूर्ण पाठ जैसा ही पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। 3-नाम के अनुरूप यह सिद्ध कुंजिका है। जब किसी प्रश्न का उत्तर नहीं मिल रहा हो, समस्या का समाधान नहीं हो रहा हो, तो सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करिए। भगवती आपकी रक्षा करेंगी। 4-भगवान शंकर कहते हैं कि सिद्धकुंजिका स्तोत्र का पाठ करने वाले को देवी कवच, अर्गला, कीलक, रहस्य, सूक्त, ध्यान, न्यास और यहां तक कि अर्चन भी आवश्यक नहीं है। केवल कुंजिका के पाठ मात्र से दुर्गा पाठ का फल प्राप्त हो जाता है। 5-क्यों है सिद्ध..इसके पाठ मात्र से पंच चक्रों का ( मारण, मोहन, वशीकरण, स्तम्भन और उच्चाटन आदि उद्देश्यों की )एक साथ जागरण हो जाता है। इसमें स्वर व्यंजन की ध्वनि है। योग और प्राणायाम है।सिद्ध कुंजिका स्तोत्र को अत्यंत सावधानी पूर्वक किया जाना चाहिए। 6-सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ परम कल्याणकारी है। इस स्तोत्र का पाठ मनुष्य के जीवन में आ रही समस्या और विघ्नों को दूर करने वाला है। मां दुर्गा के इस पाठ का जो मनुष्य विषम परिस्थितियों में वाचन करता है उसके समस्त कष्टों का अंत होता है। 7-श्रीरुद्रयामल के गौरीतंत्र में वर्णित सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का संक्षिप्त मंत्र है...''ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥'' सामान्य रूप से हम इस मंत्र का पाठ करते हैं लेकिन संपूर्ण मंत्र केवल सिद्ध कुंजिका स्तोत्र में है। संपूर्ण मंत्र यह है;- ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ऊं ग्लौं हुं क्लीं जूं स: ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा।। सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ कैसे करें?
07 FACTS;- 1-श्री गणेश- जल तत्व हैं।श्री विष्णु- पृथ्वी तत्व हैं।श्री शंकर- वायु तत्व हैं।श्री देवी - अग्रि तत्व हैं।श्री सूर्य- आकाश तत्व हैं।जीवन के लिए सर्वप्रथम जल की आवश्यकता होती है। इसलिए प्रथम पूज्य गणेश जल के अधिष्ठात्र देवता है। पृथ्वी साक्षात विष्णु देवता से संबधित तत्व है। शंकर वायु- तत्व, देवी अग्नि तत्व तथा सूर्य आकाश-तत्व के देवता है। इस प्रकार इन पांचों का पूजन कर हम अपने आप का ही पूजन करते हैं। ऐसा माना जाता है। 2-सिद्ध कुंजिका स्तोत्र को अत्यंत सावधानी पूर्वक किया जाना चाहिए। प्रतिदिन की पूजा में इसको शामिल कर सकते हैं। लेकिन यदि अनुष्ठान के रूप में या किसी इच्छाप्राप्ति के लिए कर रहे हैं तो आपको कुछ सावधानी रखनी होंगी। 2-A-संकल्प: सिद्ध कुंजिका पढ़ने से पहले हाथ में अक्षत, पुष्प और जल लेकर संकल्प करें। मन ही मन देवी मां को अपनी इच्छा कहें। 3- जितने पाठ एक साथ ( 1, 2, 3, 5. 7. 11) कर सकें, उसका संकल्प करें। अनुष्ठान के दौरान माला समान रखें। कभी एक कभी दो कभी तीन न रखें। 4-सिद्धकुंजिका स्तोत्र के पाठ का समय... 4-1- रात्रि 9 बजे करें तो अत्युत्तम। 4-2- रात को 9 से 11.30 बजे तक का समय रखें। 5-लाल आसन पर बैठकर पाठ करें। 6-दीपक; घी का दीपक दायें तरफ और सरसो के तेल का दीपक बाएं तरफ रखें। अर्थात दोनों दीपक जलाएं 7-सिद्ध कुंजिका स्तोत्र में दशों महाविद्या, नौ देवियों की आराधना है। किस इच्छा के लिए कितने पाठ करने हैं;- 10 FACTS;- 1.विद्या प्राप्ति के लिए....पांच पाठ ( अक्षत लेकर अपने ऊपर से तीन बार घुमाकर किताबों में रख दें) 2. यश-कीर्ति के लिए.... पांच पाठ ( देवी को चढ़ाया हुआ लाल पुष्प लेकर सेफ आदि में रख लें) 3. धन प्राप्ति के लिए....9 पाठ ( सफेद तिल से अग्यारी करें) 4.मुकदमे से मुक्ति के लिए...सात पाठ ( पाठ के बाद एक नींबू काट दें। दो ही हिस्से हों ध्यान रखें। इनको बाहर अलग-अलग दिशा में फेंक दें) 5. ऋण मुक्ति के लिए....सात पाठ ( जौं की 21 आहुतियां देते हुए अग्यारी करें। जिसको पैसा देना हो या जिससे लेना हो, उसका बस ध्यान कर लें) 6. घर की सुख-शांति के लिए...तीन पाठ ( मीठा पान देवी को अर्पण करें) 7.स्वास्थ्यके लिए...तीन पाठ ( देवी को नींबू चढाएं और फिर उसका प्रयोग कर लें) 8.शत्रु से रक्षा के लिए..., 3, 7 या 11 पाठ ( लगातार पाठ करने से मुक्ति मिलेगी) 9. रोजगार के लिए...3,5, 7 और 11 ( एच्छिक) ( एक सुपारी देवी को चढाकर अपने पास रख लें) 10.सर्वबाधा शांति- तीन पाठ (लौंग के तीन जोड़े अग्यारी पर चढ़ाएं या देवी जी के आगे तीन जोड़े लोंग के रखकर फिर उठा लें और खाने या चाय में प्रयोग कर लें।पाठ में अधिक समय नहीं लगेगा। पांच या सात मिनट में पाठ पूरा हो जाता है।
क्या सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का होम करना चाहिए?-
1-सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का होम न करने की आज्ञा स्वयं महादेव नें दी है ।इसका प्रथम कारण है कि कुंजिका देवी सिद्धियों की एकमात्र कुंजी है और कुंजी का रक्षण किया जाता है आहूत नहीं किया जा सकता ।यदि यदि कुंजी का ही लोप हो जाएगा तो सिद्धी के द्वार का खुलना असम्भव हो जाएगा ।दूसरा का कारण यह है कि सप्तशती में याचना स्तोत्र , कवच एवं कवच मन्त्रों की आहुति नहीं की जाती अन्यथा विनाश ही होता है ।
2-भगवान शिव भैरव स्वरूप में स्थित होकर कहते हैं ! ''कवच , अर्गला , कीलक , तथा कुंजिका का होम स्वप्न में भी न करें स्वप्न मात्र में भी होम करने से सर्वत्र नाश की संभावनाएँ प्रकट हो जाती है ।अर्गला के होमकर्म से सिद्धीयों का नाश हो जाता है । तथा होता की समस्त विद्याएँ विस्मृत हो जाती है , अर्गला अनर्गल सिद्ध हो जाती है ।कीलक के होमकर्म से होता के समस्त मन्त्र सदा सर्वदा के लिए कीलित हो जाते हैं ।इसे मेरा उत्किलित कण्ठ ही जानें जो जो कीलक का कारक है।कवच के होम से धन,धान्य, पुत्र तथा प्राण का विनाश निश्चित है । एवं होता रोग तथा शोकों से घिर जाता है।
दैनिक राशिफल
सोमवार, 31 मार्च 2025
आज का सूर्यास्तः-06.28.01 कल का सूर्योदयः- 06.50.38
मेष :- (चु, चे, चो, ला, ली, ले, लो, अ) मेष राशि वाले जातकों समय आपके हित में है, शुभ हैं, अनुकूलता आने से लाभहोगा, मित्रों व अपनों का सहयोग होने से विश्वास बढ़ेगा।
वृषः- (इ, ब, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो) वृष राशि वाले जातकों भाग्य साथ छोड़ता दिखाई दे रहा है, बनते हुयें कार्यों में रुकावट पैदा हो सकती है। आप किसी भी पद पर क्यूं न हो, आपको अपने अधिकारियों से बिना बात के बातें सुनने को मिल सकती हैं।
मिथुन :- (का, की, कु, घ, ङ, छ, के, को, हा) मिथुन राशि वाले जातकों यदि घर अथवा बाहर किसी बात को लेकर तनाव चल रहा है, तो पारिवारिक और सामाजिक संबंधों में सुधार आयेगा। धन की समस्या दूर होती दिखाई दे रही है, राजकीय क्षेत्र में भी मान मिलेगा।
कर्क :- (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो) कर्क राशि वाले जातकों समय उत्तम हैं तथा भाग्य साथ देगा, चल-अचल संपत्ति के व्यवसाय से लाभ होगा व आगे बढ़ने के भी अवसर प्राप्त होंगे। स्थानांतरण के योग भी न रहे हैं।
सिंह :- (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे) सिंह राशि वाले जातकों निजि जरूरतों की पूर्ति होती रहेगी, परिवार व संतान के साथ समय व्यतीत करने से आप के मन के अन्दर चल रही गुप्त चिंताओं से भी मुक्ति मिल जायेगी। विद्यार्थी को उनकी मेहनत का फल मिलेगा।
कन्या :- (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो) कन्या राशि वाले जातकों यदि आप किसी रोग से पीड़ित थे, तो स्वास्थ्य में सुधार आयेगा और मन में एक प्रसन्नता भी बनेगी। मायूसी समाप्त हो जाएगी। अपनों का पूर्ण सहयोग रहेगा।
तुला :- (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तु, ते) तुला राशि कले जातकों समय शुभ व अनुकूल है, लोगों का समर्थन प्राप्त होगा, अपने आचार व व्यवहार आदि के कारण गौरवान्वित होंगे, सुख-सौभाग्य में वृद्धि होगी लेकिन कोई अपरिचित व्यक्ति अकारण ही आपको किसी बात को लेकर चिंता में डाल सकता है, सावधान रहें।
वृश्चिक :- (तो, न, नी, ने, नो, नू, या, यी, यू) वृश्चिक राशि वाले जातकों आर्थिक स्थिति में सुधार होता दिखाई दे रहा है। सामाजिक मेल-मिलाप बढ़ेगा। आप कोई मनचाही बात पूरी हो सकती है।
धनुः- (ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे) धनु राशि वाले जातकों सामाजिक तौर पर विशेष प्रस्ताव प्राप्त होंगे, घर में मांगलिक कार्य संपन्न होता दिखाई दे रहा है। साहस व उत्साह बना रहेगा।
मकर :- (भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी) मकर राशि वाले जातकों सामान्य गति से दिनचर्या रहेगी, बिगड़ी हुई परिस्थितियों में सुधार होगा। सामाजिक सेवा का अवसर मिलेगा। घर से कहीं दूर जाना पड़ सकता है।
कुम्भ :- (गू, गे, गो, सा, सी, सु, से, सो, दा) कुम्भ राशि वाले जातकों शारीरिक व मानसिक तनाव बढ़ेगा, विचारों में अस्थिरता बनी रहेगी, अपनों के साथ सामंजस्य नहीं बिठा पाएंगे, कोई भी निर्णय लेना कठिन होगा।
मीनः (दी, दू, थ, झ, दे, दो, चा, ची, ञ) मीन राशि वाले जातकों समय में परिवर्तन होता नजर आ रहा है, जिस के कारण बांधाएं आ सकती हैं। पैसों का लेन-देन सोच-समझ कर करें, रकम डूब सकती है। जिम्मेदारियों के बढ़ने से मन में चिंता व्याप्त होगी। 🕉️🕉️🕉️🕉️ *☠️🐍जय श्री महाकाल सरकार ☠️🐍*🪷* ▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ *♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।* *अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।* *हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।* *राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...* *👉कामना-भेद-बन्दी-मोक्ष* *👉वाद-विवाद(मुकदमे में) जय* *👉दबेयानष्ट-धनकी पुनः प्राप्ति*। *👉*वाणीस्तम्भन-मुख-मुद्रण* *👉*राजवशीकरण* *👉*शत्रुपराजय* *👉*नपुंसकतानाश/ पुनःपुरुषत्व-प्राप्ति* *👉 *भूतप्रेतबाधा नाश* *👉 *सर्वसिद्धि* *👉 *सम्पूर्ण साफल्य हेतु, विशेष अनुष्ठान हेतु। संपर्क करें।* *♥️रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* *।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 🕉️📿🔥🌞🚩🔱🚩🔥🌞
*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक - 30 मार्च 2025* *🎈दिन - शनिवार* *🎈 संवत्सर -विश्वावसु* *🎈संवत्सर- (उत्तर) सिद्धार्थी* *🎈विक्रम संवत् - 2082* *🎈अयन - उत्तरायण* *🎈ऋतु - बसन्त* *🎉मास - चैत्र* *🎈पक्ष- शुक्ल* *🎈तिथि - प्रतिपदा 12:48:52 पी एम तत्पश्चात द्वितीय * *🎈नक्षत्र - रेवती 16:34:03 शाम तत्पश्चात अश्विनी* *🎈योग -ऐन्द्र 17:52:41 शाम तक, तत्पश्चात वैधृति* *🎈करण- बव 12:48:52 pm तत्पश्चात कौलव* *🎈राहु काल_हर जगह का अलग है- सुबह 05:18 से दोपहर 06:05 pm तक* *🎈सूर्योदय - 06:29:07* *🎈सूर्यास्त - 06:50:08 *🎈 चन्द्र राशि - मीनtill 16:34:03* *🎈 चन्द्र राशि मेष from 16:34:03* *🎈सूर्य राशि - मीन* *⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में* *⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 04:55 से प्रातः 05:41 तक,* *⛅अभिजीत मुहूर्त - 12:15 पी एम से 01:04 पी एम* *⛅निशिता मुहूर्त - 12:16 ए एम, मार्च 31 से 01:02 ए एम, मार्च 31तक* *⛅ विशेष- नवरात्रि के व्रत में इन चीज़ों से बचना चाहिए: संरक्षक, कृत्रिम शर्करा, या योजक वाले पैकेज्ड और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ बासी भोजन उड़द दाल 🎈नवरात्रि के व्रत में ये चीज़ें खाई जा सकती हैं:💕 🎈सेंधा नमक फल, सब्ज़ियां, और डेयरी उत्पाद कुट्टू, सिंघाड़ा, और सामक चावल जैसे अनाज साबूदाने की टिक्कियां साबूदाने के और आलू के पापड़ नवरात्रि के व्रत में हल्का और सुपाच्य भोजन खाना चाहिए. ज़्यादा तला-भुना खाने से ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है। *🎈व्रत पर्व विवरण - 👉*⛅ विशेष- * चैत्रीय नवरात्रि,हिन्दू नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं*। जप,तप, पूजन, ध्यान, व्रत माला ९ दिन विशेष रहेगा। *🛟चोघडिया, दिन🛟* उद्वेग 06:29 - 08:02 अशुभ चर 08:02 - 09:34 शुभ लाभ 09:34 - 11:07 शुभ अमृत 11:07 - 12:40 शुभ काल 12:40 - 14:12 अशुभ शुभ 14:12 - 15:45 शुभ रोग 15:45 - 17:18 अशुभ उद्वेग 17:18 - 18:50 अशुभ
🙏♥️||#शनिराहु (पिशाच योग ) :-♥️ #शनिराहु (पिशाच योग ) 29 मार्च से 18 मई तक राहु और शनि एक साथ रहेंगे मार्च से मई 1 तक कुछ ना कुछ बड़ा तूफान मचाएंगे रातों की नींद उड़ा देंगे
#शनि का #गोचर
29 मार्च 2025 शनिवार के दिन पूर्व के काफी वर्षों के बाद षष्टग्रही योग से दुर्लभ योग-संयोग का निर्माण हो रहा है। शनि 29 मार्च को रात 10 बजकर 7 मिनट पर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। इस दुर्लभसंयोग में, शनि का राशि परिवर्तन और सूर्य ग्रहण एक ही दिन पड़ रहा है। इसमें से कुछ योग अशुभ है तो कुछ शुभ योग भी हैं परंतु ग्रहण योग के चलते यह दिन अशुभ माना जा रहा है। इस दिन दोपहर 2 बजकर 20 मिनट पर सूर्य ग्रहण आरंभ होगा और सायं 6 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगा। इसलिए इस दिन सावधान रहकर कार्य करने की जरूरत है। खासकर कुछ राशियों को सतर्क रहना होगा। आइए जानते हैं विस्तार से।
ग्रहों की युति
षष्टग्रही योग :- इस दिन बृहस्पति की मीन राशि में शनि, राहु, सूर्य, बुध, शुक्र और चंद्र की युति बन रही है। यानि छह ग्रह एक ही राशि में हैं जो कि बहुत दुर्लभ योग है। इस योग से कई अन्य योगों का निर्माण भी हो रहा है।
शनिश्चरी अमावस्याः- इस दिन उपरोक्त योग शनिवार की अमावस्या के दिन बन रहे हैं। अमावस्या को वैसे ही अशुभ दिन माना जाता है और शनिवार एवं अमावस्या दोनों ही शनि के दिन है। इसलिए शनि के कोई भी मंदे कार्य न करें।
🏓सूर्य ग्रहणः- इस दिन सूर्य ग्रहण का योग भी रहेगा। हालांकि यह ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा। मीन राशि में सूर्य के साथ राहु के होने से भी गोचर कुंडली में सूर्य ग्रहण का संयोग भी बन रहा है।
🏓चंद्र ग्रहण योगः- इस दिन मीन राशि में चंद्र और राहु की युति के चलते गोचर कुंडली में चंद्र ग्रहण योग भी बन रहा है जो कि मानसिक बेचैनी बढ़ाना वाला माना जाता है।
🏓शनि मीन योग
शनि मीन योग: 29 मार्च 2025 को शनि अपनी ही कुंभ राशि से निकलेंगे
🏓बृहस्पति की मीन राशि में प्रवेश करेगा। शनि का बृहस्पति की राशि में गोचर करना अच्छा नहीं माना जाता है। कहा जा रहा है कि शनि जब भी राशि परिवर्तन करते हैं तो देश और दुनिया में बहुत बड़े बदलाव होते हैं। युद्ध, प्राकृतिक आपदा और आंदोलन के साथ ही शनि की वस्तुओं में भी तेजी देखी जा सकती है। पहले हम जान लेते हैं कि किस तरह शनि ने पूर्व में राशि परिवर्तन करके तबाही मचाई थी और अब आगे वह क्या तबाही मचाएंगे।
🏓पिशाच योग
🏓पिशाच योग :- इस दिन मीन राशि में शनि और राहु की युति के चलते पिशाच योग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिष के अनुसार इसे चांडाल योग और कालसर्प योग से भी ज्यादा अशुभ माना गया है। इस योग से जातक को हर कदम पर संघर्ष करना होता है।
💥अचानक से घटना या दुर्घटना का योग बनता है।💥
🔥विष योगः- इस दिन मीन राशि में शनि और चंद्र की युति से विष योग का निर्माण भी हो रहा है। यह बहुत ही अनिष्टकारी योग माना गया है। इस योग के चलते चंद्र के फल नष्ट हो जाते हैं और शांति भंग हो जाती है। जीवन में भटकाव ज्यादा बढ़ता है।
🏓राजयोग
🏓बुधादित्य राजयोगः- मीन राशि में ही सूर्य और बुध की युति के चलते बुधादित्य नामक राजयोग का निर्माण भी हो रहा है। यह समृद्धि, बुद्धिमत्ता और व्यावसायिक सफलता का संकेत देता है।
🏓शुक्रादित्य राजयोगः- सूर्य और शुक्र एक साथ मीन राशि में हैं जिसके चलते यह शुक्रादित्य नामक राजयोग बनता है, जो प्रेम, सौंदर्य और वैभव में वृद्धि का कारण बनेगा।
🏓लक्ष्मी नारायण योग :- जब बुध और शुक्र एक ही राशि में युति बनाते हैं तो यह लक्ष्मी नारायण योग बनता है। यह योग धन और वैभव में वृद्धि लाता है।
*चैत्रीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं*। 30 मार्च 2025, रविवार को हिंदू नववर्ष संवत्सर 2082 के साथ बासंतिक नवरात्रि काआरंभ होगा, जिसे कालयुक्त नाम से जाना जाएगा। इस बार नवरात्रि नौ की बजाय आठ दिन के होंगे । -------------------------------- *चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक मनाए जाने वाले बासंतीय नवरात्र इस बार नौ के बजाय आठ दिन के होंगे।क्योंकि इस बार तृतीया तिथि के क्षय होने से ऐसा होगा। नवरात्रि रविवार 30मार्च 2025 को आरम्भ हो रहे है।जो कि 6 अप्रैल 2025राम नवमी तक मनाए जाएंगे। चैत्र शुक्ला प्रतिपदा के दिन विक्रम संवत 2082 व शालीवाहन शाके 1947 का शुभारंभ श्री सिद्धार्थ नामक संवत्सर में हो रहा है।इस वर्ष के राजा सूर्य व मंत्री भी सूर्य होंगे। इस बार प्रात: वैधृति योग नहीं होने से इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा रविवार को मीन द्विस्वभाव लग्न प्रात: सूर्योदय से 6:35 बजे से 7:15 बजे तक,चंचल वेला प्रात:08:02 बजे से 09:34 बजे तक,लाभ अमृत वेला प्रात:9:34 से दोपहर 11:07 बजे तक, अभिजित वेला में दोपहर 12:15 से 1:04 बजे तक घट स्थापना का सर्व श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा*।
प्रथम शैलपुत्री नवदुर्गा में माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप श्री शैलपुत्री वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्द्वकृत शेखराम। वृषारूढ़ा शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम॥ श्री दुर्गा का प्रथम रूप श्री शैलपुत्री हैं। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण ये शैलपुत्री कहलाती हैं। नवरात्र के प्रथम दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। गिरिराज हिमालय की पुत्री होने के कारण भगवती का प्रथम स्वरूप शैलपुत्री का है, जिनकी आराधना से प्राणी सभी मनोवांछित फल प्राप्त कर लेता है। मां दुर्गा शक्ति की उपासना का पर्व शारदीय नवरात्र प्रतिपदा सेनवमी तक सनातन काल से मनाया जाता रहा है. आदि-शक्ति के हर रूप की नवरात्र के नौ दिनों में पूजा की जाती है. अत: इसे नवरात्र के नाम भी जाना जाता है. सभीदेवता, राक्षस, मनुष्य इनकी कृपा-दृष्टि के लिए लालायित रहते हैं. यह हिन्दू समाज का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जिसका धार्मिक, आध्यात्मिक, नैतिकव सांसारिक इन चारों ही दृष्टिकोण से काफी महत्व है.दुर्गा पूजा का त्यौहार वर्ष में दो बार आता है, एक चैत्र मास में और दूसरा आश्विन मास में चैत्र माह में देवी दुर्गा की पूजा बड़े ही धूम धाम से की जाती है लेकिन आश्विन मास का विशेष महत्व है. दुर्गा सप्तशती में भी आश्विन माह के शारदीयनवरात्रों की महिमा का विशेष बखान किया गया है. दोनों मासों में दुर्गा पूजा का विधान एक जैसा ही है, दोनों ही प्रतिपदा से दशमी तिथि तक मनायी जाती है। नवरात्र पूजन के प्रथम दिन मां शैलपुत्री जी का पूजन होता है. शैलराज हिमालय की कन्या होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा गया है, माँ शैलपुत्री दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल का पुष्प लिए अपने वाहन वृषभ पर विराजमान होतीं हैं. नवरात्र के इस प्रथम दिन की उपासना में साधक अपने मन को ‘मूलाधार’ चक्र में स्थित करते हैं, शैलपुत्री का पूजन करने से ‘मूलाधार चक्र’ जागृत होता है और यहीं से योग साधना आरंभ होती है जिससे अनेक प्रकार की शक्तियां प्राप्त होती हैं. मंत्र :वन्दे वांछितलाभाय चन्दार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्। कलश स्थापना: विधि नवरात्रा का प्रारम्भ आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना के साथ होता है. कलश को हिन्दु विधानों में मंगलमूर्ति गणेश कास्वरूप माना जाता है अत: सबसे पहले कलश की स्थान की जाती है. कलश स्थापना के लिए भूमि को सिक्त यानी शुद्ध किया जाता है. भूमि की शुद्धि के लिए गाय के गोबर और गंगा-जल से भूमि को लिपा जाता है। शैलपुत्री पूजा विधि: शारदीय नवरात्र पर कलश स्थापना के साथ ही माँ दुर्गा की पूजा शुरू की जाती है. पहले दिन माँ दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा होती है. दुर्गा को मातृ शक्ति यानी स्नेह, करूणा और ममता का स्वरूप मानकर हम पूजते हैं .अत: इनकी पूजा में सभी तीर्थों, नदियों, समुद्रों, नवग्रहों,दिक्पालों, दिशाओं, नगर देवता, ग्राम देवता सहित सभी योगिनियों को भी आमंत्रित किया जाता और और कलश में उन्हें विराजने हेतु प्रार्थना सहित उनका आहवान किया जाता है. कलश में सप्तमृतिका यानी सात प्रकार की मिट्टी, सुपारी, मुद्रा सादर भेट किया जाता है और पंच प्रकार के पल्लव से कलश को सुशोभित किया जाता है.इस कलश के नीचे सात प्रकार के अनाज और जौ बोये जाते हैं जिन्हें दशमी तिथि को काटा जाता है और इससे सभी देवी-देवता की पूजा होती है. इसे जयन्ती कहते हैं जिसे इस मंत्र के साथ अर्पित किया जाता है “जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी, दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा, स्वधा नामोस्तुते”. इसी मंत्र से पुरोहित यजमान के परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर जयंती डालकर सुख, सम्पत्ति एवं आरोग्य का आर्शीवाद देते हैं।कलश स्थापना के पश्चात देवी का आह्वान किया जाता है कि ‘हे मां दुर्गा हमने आपका स्वरूप जैसा सुना है उसी रूप में आपकी प्रतिमा बनवायी है आप उसमें प्रवेश कर हमारी पूजा अर्चना को स्वीकार करें’. देवी दुर्गा की प्रतिमा पूजा स्थल पर बीच में स्थापित की जाती है और उनके दोनों तरफ यानी दायीं ओर देवी महालक्ष्मी, गणेश और विजया नामक योगिनी की प्रतिमा रहती है और बायीं ओर कार्तिकेय, देवी महासरस्वती और जया नामक योगिनी रहती है तथा भगवान भोले नाथ की भी पूजा की जाती है. प्रथम पूजन के दिन “शैलपुत्री” के रूप में भगवती दुर्गा दुर्गतिनाशिनी की पूजा फूल, अक्षत, रोली, चंदन से होती हैं। शैलपुत्री की ध्यान वन्दे वांछितलाभाय चन्द्रर्धकृत शेखराम्। वृशारूढ़ा शूलधरां शैलपुत्री यशस्वनीम्॥ पूणेन्दु निभां गौरी मूलाधार स्थितां प्रथम दुर्गा त्रिनेत्राम्॥ पटाम्बर परिधानां रत्नाकिरीटा नामालंकार भूषिता॥ प्रफुल्ल वंदना पल्लवाधरां कातंकपोलां तुग कुचाम्। कमनीयां लावण्यां स्नेमुखी क्षीणमध्यां नितम्बनीम्॥ शैलपुत्री की स्तोत्र पाठ: प्रथम दुर्गा त्वंहिभवसागर: तारणीम्। धन ऐश्वर्यदायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यम्॥ त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्। सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम्॥ चराचरेश्वरी त्वंहिमहामोह: विनाशिन। मुक्तिभुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रमनाम्यहम्॥ शैलपुत्री की कवच : ओमकार: मेंशिर: पातुमूलाधार निवासिनी। हींकार: पातु ललाटे बीजरूपा महेश्वरी॥ श्रींकारपातुवदने लावाण्या महेश्वरी । हुंकार पातु हदयं तारिणी शक्ति स्वघृत। फट्कार पात सर्वागे सर्व सिद्धि फलप्रदा॥ माँ दुर्गा की आरती जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी । तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को । उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै । रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी । सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती । कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती । धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे । मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी । आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू । बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता । भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी । मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती । श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे । कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥ पूजन के बाद श्री दुर्गा सप्तशती पाठ करे।
🕉️🕉️🕉️🕉️ *☠️🐍जय श्री महाकाल सरकार ☠️🐍*🪷* ▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ *♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।* *अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।* *हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।* *राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...* *👉कामना-भेद-बन्दी-मोक्ष* *👉वाद-विवाद(मुकदमे में) जय* *👉दबेयानष्ट-धनकी पुनः प्राप्ति*। *👉*वाणीस्तम्भन-मुख-मुद्रण* *👉*राजवशीकरण* *👉*शत्रुपराजय* *👉*नपुंसकतानाश/ पुनःपुरुषत्व-प्राप्ति* *👉 *भूतप्रेतबाधा नाश* *👉 *सर्वसिद्धि* *👉 *सम्पूर्ण साफल्य हेतु, विशेष अनुष्ठान हेतु। संपर्क करें।* *♥️रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* *।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 🕉️📿🔥🌞🚩🔱🚩🔥🌞
*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक - 29 मार्च 2025* *🎈दिन - शनिवार* *🎈विक्रम संवत् - 2081* *🎈अयन - उत्तरायण* *🎈ऋतु - बसन्त* *🎉मास - चैत्र* *🎈पक्ष- कृष्ण* *🎈तिथि - अमावस्या 16:26:57 पी एम शाम तत्पश्चात प्रतिपदा* *🎈नक्षत्र - उत्तरभाद्रपदा 19:25:44रात्रि तत्पश्चात रेवती* *🎈योग -ब्रह्म 22:02:25 तक, तत्पश्चात ऐन्द्र* *🎈करण- नाग 16:26:57 तत्पश्चात बव* *🎈राहु काल_हर जगह का अलग है- सुबह 09:35 से दोपहर 11:08 pm तक* *🎈सूर्योदय - 06:30:14* *🎈सूर्यास्त - 06:49:37 *🎈 चन्द्र राशि - मीन* *🎈सूर्य राशि - मीन* *⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में* *⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 04:57 से प्रातः 05:43 तक,* *⛅अभिजीत मुहूर्त - 12:15 पी एम से 01:05 पी एम* *⛅निशिता मुहूर्त - 12:16 ए एम, मार्च 30 से 01:03 ए एम, मार्च 30 तक* *⛅ विशेष- शनिश्चरी अमावस्या के दिन जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े और तेल का दान करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। 2. शनि कृपा पाने के लिए शनिश्चरी अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए और सरसों के तेल का दीपक जलाएं। *🎈व्रत पर्व विवरण - 👉*⛅ विशेष- चैत्र अमावस्या या शनिश्चरी अमावस्या के दिन बाल, नाखून और रोटी काटना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 4. इस दिन लोगों को मांस और शराब जैसे मांसाहारी भोजन के सेवन से भी बचना चाहिए। *🛟चोघडिया, दिन🛟* काल 06:30 - 08:03 अशुभ शुभ 08:03 - 09:35 शुभ रोग 09:35 - 11:08 अशुभ उद्वेग 11:08 - 12:40 अशुभ चर 12:40 - 14:12 शुभ लाभ 14:12 - 15:45 शुभ अमृत 15:45 - 17:17 शुभ काल 17:17 - 18:50 अशुभ
🙏♥️||#शनिराहु (पिशाच योग ) :-♥️ #शनिराहु (पिशाच योग ) 29 मार्च से 18 मई तक राहु और शनि एक साथ रहेंगे मार्च से मई 1 तक कुछ ना कुछ बड़ा तूफान मचाएंगे रातों की नींद उड़ा देंगे अपने रिलेशनशिप 3 महीने संभाल लेना क्योंकि शनि राहु का फल राहु के अनुसार ही होगा कुंडली में राहु खराब तो बहुत खराब समय कई लोगों का तो खराब टाइम शुरू भी हो गया होगा 29 मार्च को सूर्य ग्रहण भी है 29 मार्च को 6 ग्रह मीन राशि में एक साथ होंगे
राक्षसों का सेनापति राहु और न्याय देव शनि एक दूसरे से टकरा रहे हैं। और देवताओ का सेनापति मंगल की क्रूर दृष्टि यानी सेना और पुलिस की वृष्टि राहु के नक्षत्रों पर होगी। यानी राक्षसों के सेनापति के घरों पर
जो मनुष्य ज्योतिष शास्त्र को न जानते हुए ज्योतिष शास्त्र की निन्दा करता है, वह रौरव नामक नरक को भोगकर दूसरे जन्म में अन्धा होता है। 🕉️🕉️🕉️🕉️ *☠️🐍जय श्री महाकाल सरकार ☠️🐍*🪷* ▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ *♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।* *अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।* *हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।* *राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...* *👉कामना-भेद-बन्दी-मोक्ष* *👉वाद-विवाद(मुकदमे में) जय* *👉दबेयानष्ट-धनकी पुनः प्राप्ति*। *👉*वाणीस्तम्भन-मुख-मुद्रण* *👉*राजवशीकरण* *👉*शत्रुपराजय* *👉*नपुंसकतानाश/ पुनःपुरुषत्व-प्राप्ति* *👉 *भूतप्रेतबाधा नाश* *👉 *सर्वसिद्धि* *👉 *सम्पूर्ण साफल्य हेतु, विशेष अनुष्ठान हेतु। संपर्क करें।* *♥️रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* *।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 🕉️📿🔥🌞🚩🔱🚩🔥🌞
*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक - 28 मार्च 2025* *🎈दिन - शुक्रवार* *🎈विक्रम संवत् - 2081* *🎈अयन - उत्तरायण* *🎈ऋतु - बसन्त* *🎉मास - चैत्र* *🎈पक्ष- कृष्ण* *🎈तिथि - चतुर्दशी 19:54:55 पी एम शाम तत्पश्चात अमावस्या* *🎈नक्षत्र - पूर्वभाद्रपदा 22:08:44 रात्रि तत्पश्चात उत्तर भाद्रपद* *🎈योग -शुक्ल 26:06:01 तक, तत्पश्चात ब्रह्म* *🎈करण- विष्टि भद्र 09:32:04 तत्पश्चात नाग* *🎈राहु काल_हर जगह का अलग है- सुबह 11:08 से दोपहर 12:40 pm तक* *🎈सूर्योदय - 06:31:20* *🎈सूर्यास्त - 06:49:20* *🎈चन्द्र राशि- कुम्भ* *🎈 चन्द्र राशि- मीन from 16:46:55* *🎈सूर्य राशि - मीन* *⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में* *⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 04:56 से प्रातः 05:44 तक,* *⛅अभिजीत मुहूर्त - 12:15 पी एम से 01:05 पी एम* *⛅निशिता मुहूर्त - 12:16 ए एम, मार्च 29 से 01:03 ए एम, मार्च 29तक* *⛅ विशेष- चतुर्दशी तिथि पर किसी भी पक्ष की चतुर्दशी में शुभ कार्य करना वर्जित हैं क्योंकि इसे क्रूरा कहा जाता है। इसके अलावा चतुर्दशी तिथि रिक्ता तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं दोनों पक्षों की चतुर्दशी तिथि पर भगवान शिव की पूजा करना शुभ माना जाता है। इस तिथि पर रात्रि में शिव मंत्र या जागरण करना उत्तम रहता है। *🎈व्रत पर्व विवरण - 👉*⛅ विशेष- चतुर्दशी तिथि पर, खासकर पितृ पक्ष में, अकाल मृत्यु से गुजर चुके पितरों का श्राद्ध किया जाता है, साथ ही यमराज के लिए दीपक जलाकर परिवार की रक्षा की जाती है. *🛟चोघडिया, दिन🛟* चर 06:31 - 08:04 शुभ लाभ 08:04 - 09:36 शुभ अमृत 09:36 - 11:08 शुभ काल 11:08 - 12:40 अशुभ शुभ 12:40 - 14:12 शुभ रोग 14:12 - 15:45 अशुभ उद्वेग 15:45 - 17:17 अशुभ चर 17:17 - 18:49 शुभ
🙏♥️||रुद्राक्ष के विशेष चमत्कार:-♥️ शनि अमावस्या के दिन धारण करें चौदह मुखी रुद्राक्ष और पाएं कालसर्प, शनि दोष सहित इन दोषों से निजात शनिश्चरी अमावस्या का दिन बड़ा ही श्रेष्ठ है ,चौदह मुखी रुद्राक्ष भी शनि ग्रह से संबंध रखता है। इस रुद्राक्ष को महाशनि भी कहते हैं। अतः शनि संबंधी परेशानियों से बचने के लिये चौदह मुखी रुद्राक्ष आपके लिये फायदेमंद हो सकता है। अमावस्या तिथि शनिवार के साथ पड़ रही है, इसीलिए ये शनिश्चरी अमावस्या है। शास्त्रों में शनिश्चरी अमावस्या का बड़ा ही महत्व है। शनिदेव की पूजा करने से, उनके निमित्त उपाय करने से शनिदेव बहुत जल्दी खुश होते हैं, साथ ही जन्मपत्रिका में अशुभ शनि के प्रभाव से होने वाली परेशानियों, जैसे तशनि की साढे-साती, ढैय्या और कालसर्प योग से भी छुटकारा मिलता है।शनि देव कर्मफल दाता हैं, वे न्याय के देवता हैं। शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्म के आधार पर फल देते हैं। शनिदेव, जिनके गुरु स्वयं भगवान शिव हैं, जब प्रसन्न होते हैं तो ढेर सारी खुशियां देते हैं, लेकिन जब कोई कुछ गलत करता है, तो वह शनि की दृष्टि से नहीं बच सकता। अतः शनि संबंधी परेशानियों से बचने के लिये शनिश्चरी अमावस्या का दिन बड़ा ही श्रेष्ठ है चौदह मुखी रुद्राक्ष भी शनि ग्रह से संबंध रखता है। इस रुद्राक्ष को महाशनि भी कहते हैं। अतः शनि संबंधी परेशानियों से बचने के लिये चौदह मुखी रुद्राक्ष विशेष होता है। किसी भी तरह के प्राण प्रतिष्ठित रुद्राक्ष बीज ओर गुरु के सानिध्य में ही धारण करना चाहिए। 🕉️🕉️🕉️🕉️ *☠️🐍जय श्री महाकाल सरकार ☠️🐍*🪷* ▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ *♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।* *अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।* *हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।* *राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...* *👉कामना-भेद-बन्दी-मोक्ष* *👉वाद-विवाद(मुकदमे में) जय* *👉दबेयानष्ट-धनकी पुनः प्राप्ति*। *👉*वाणीस्तम्भन-मुख-मुद्रण* *👉*राजवशीकरण* *👉*शत्रुपराजय* *👉*नपुंसकतानाश/ पुनःपुरुषत्व-प्राप्ति* *👉 *भूतप्रेतबाधा नाश* *👉 *सर्वसिद्धि* *👉 *सम्पूर्ण साफल्य हेतु, विशेष अनुष्ठान हेतु। संपर्क करें।* *♥️रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* *।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 🕉️📿🔥🌞🚩🔱🚩🔥🌞
*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक - 27 मार्च 2025* *🎈दिन - गुरुवार* *🎈विक्रम संवत् - 2081* *🎈अयन - उत्तरायण* *🎈ऋतु - बसन्त* *🎉मास - चैत्र* *🎈पक्ष- कृष्ण* *🎈तिथि - त्रयोदशी 11:03:05 रात्रि* तत्पश्चात चतुर्दशी* *🎈नक्षत्र - शतभिष 24:32:54 रात्रि तत्पश्चात पूर्वभाद्रपदा* *🎈योग -साध्य 09:23:57 तक, तत्पश्चात शुक्ल* *🎈करण- गर 12:26:53 तत्पश्चात विष्टि भद्र* *🎈राहु काल_हर जगह का अलग है- सुबह 02:15से दोपहर 03:45pm तक* *🎈सूर्योदय - 06:32:26* *🎈सूर्यास्त - 06:48:37* *🎈चन्द्र राशि- कुम्भ* *🎈सूर्य राशि - मीन* *⛅दिशा शूल - दक्षिण दिशा में* *⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 04:58 से प्रातः 05:44 तक,* *⛅अभिजीत मुहूर्त - 12:16 पी एम से 01:05 पी एम* *⛅निशिता मुहूर्त - 12:17 ए एम, मार्च 28 से 01:03 ए एम, मार्च 28तक* *⛅ विशेष- त्रयोदशी तिथि पर बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए, ऐसा धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है। *🎈व्रत पर्व विवरण - 👉*⛅ विशेष- प्रदोष व्रत *🛟चोघडिया, दिन🛟* शुभ 06:32 - 08:04 शुभ रोग 08:04 - 09:36 अशुभ उद्वेग 09:36 - 11:09 अशुभ चर 11:09 - 12:41 शुभ लाभ 12:41 - 14:13 शुभ अमृत 14:13 - 15:45 शुभ काल 15:45 - 17:17 अशुभ शुभ 17:17 - 18:49 शुभ
🙏♥️||गुरु प्रदोष व्रत विशेष:-♥️ त्रयोदशी तिथि में सायंकाल को प्रदोष काल कहा जाता है। प्रदोष व्रत को मंगलकारी एवं शिव की कृपा दिलाने वाला माना गया है। गुरु प्रदोष त्रयोदशी व्रत करने वाले को 100 गायें दान करने का फल प्राप्त होता है तथा यह सभी प्रकार के कष्ट और पापों को नष्ट करता है। इस व्रत की कथा श्रवण करने से यानी सुनने से ऐश्वर्य और विजय का शुभ वरदान मिलता है।
गुरु प्रदोष व्रत का महत्व और मंत्र गुरु प्रदोष व्रत शत्रुओं का विनाश करने वाला भी माना गया। श्री सूतजी के अनुसार- यह अति श्रेष्ठ शत्रु विनाशक भक्ति प्रिय व्रत है। गुरु प्रदोष व्रत कथा से मिलेगा ऐश्वर्य और विजय का शुभ वरदान गुरुवार त्रयोदशी प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा :- इस व्रत कथा के अनुसार एक बार इंद्र और वृत्तासुर की सेना में घनघोर युद्ध हुआ। देवताओं ने दैत्य-सेना को पराजित कर नष्ट-भ्रष्ट कर डाला। यह देख वृत्तासुर अत्यंत क्रोधित हो स्वयं युद्ध को उद्यत हुआ। आसुरी माया से उसने विकराल रूप धारण कर लिया। सभी देवता भयभीत हो गुरुदेव बृहस्पति की शरण में पहूंचे। बृहस्पति महाराज बोले- पहले मैं तुम्हें वृत्तासुर का वास्तविक परिचय दे दूं।
वृत्तासुर बड़ा तपस्वी और कर्मनिष्ठ है। उसने गंधमादन पर्वत पर घोर तपस्या कर शिवजी को प्रसन्न किया। पूर्व समय में वह चित्ररथ नाम का राजा था। एक बार वह अपने विमान से कैलाश पर्वत चला गया।
वहां शिवजी के वाम अंग में माता पार्वती को विराजमान देख वह उपहासपूर्वक बोला- 'हे प्रभो! मोह-माया में फंसे होने के कारण हम स्त्रियों के वशीभूत रहते हैं किंतु देवलोक में ऐसा दृष्टिगोचर नहीं हुआ कि स्त्री आलिंगनबद्ध हो सभा में बैठे।'
चित्ररथ के यह वचन सुन सर्वव्यापी शिवशंकर हंसकर बोले- 'हे राजन! मेरा व्यावहारिक दृष्टिकोण पृथक है। मैंने मृत्युदाता-कालकूट महाविष का पान किया है, फिर भी तुम साधारणजन की भांति मेरा उपहास उड़ाते हो!'
माता पार्वती क्रोधित हो चित्ररथ से संबोधित हुईं- 'अरे दुष्ट! तूने सर्वव्यापी महेश्वर के साथ ही मेरा भी उपहास उड़ाया है अतएव मैं तुझे वह शिक्षा दूंगी कि फिर तू ऐसे संतों के उपहास का दुस्साहस नहीं करेगा- अब तू दैत्य स्वरूप धारण कर विमान से नीचे गिर, मैं तुझे शाप देती हूं।'
जगदम्बा भवानी के अभिशाप से चित्ररथ राक्षस योनि को प्राप्त हुआ और त्वष्टा नामक ऋषि के श्रेष्ठ तप से उत्पन्न हो वृत्तासुर बना।
गुरुदेव बृहस्पति आगे बोले- 'वृत्तासुर बाल्यकाल से ही शिवभक्त रहा है अत हे इंद्र! तुम बृहस्पति प्रदोष व्रत कर शंकर भगवान को प्रसन्न करो।'
देवराज ने गुरुदेव की आज्ञा का पालन कर बृहस्पति प्रदोष व्रत किया। गुरु प्रदोष व्रत के प्रताप से इंद्र ने शीघ्र ही वृत्तासुर पर विजय प्राप्त कर ली और देवलोक में शांति छा गई। अत: प्रदोष व्रत हर शिव भक्त को अवश्य करना चाहिए। 🕉️🕉️🕉️🕉️ *☠️🐍जय श्री महाकाल सरकार ☠️🐍*🪷* ▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ *♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।* *अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।* *हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।* *राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...* *👉कामना-भेद-बन्दी-मोक्ष* *👉वाद-विवाद(मुकदमे में) जय* *👉दबेयानष्ट-धनकी पुनः प्राप्ति*। *👉*वाणीस्तम्भन-मुख-मुद्रण* *👉*राजवशीकरण* *👉*शत्रुपराजय* *👉*नपुंसकतानाश/ पुनःपुरुषत्व-प्राप्ति* *👉 *भूतप्रेतबाधा नाश* *👉 *सर्वसिद्धि* *👉 *सम्पूर्ण साफल्य हेतु, विशेष अनुष्ठान हेतु। संपर्क करें।* *♥️रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* *।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 🕉️📿🔥🌞🚩🔱🚩🔥🌞
*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक - 26 मार्च 2025* *🎈दिन - बुधवार* *🎈विक्रम संवत् - 2081* *🎈अयन - उत्तरायण* *🎈ऋतु - बसन्त* *🎉मास - चैत्र* *🎈पक्ष- कृष्ण* *🎈तिथि - द्वादशी 25:42:25am* तत्पश्चात त्रयोदशी* *🎈नक्षत्र - धनिष्ठा 26:28:52 रात्रि तत्पश्चात शतभिष* *🎈योग -सिद्ध 12:24:27 तक, तत्पश्चात साध्य* *🎈करण- कौलव 14:48:44 तत्पश्चात गर* *🎈राहु काल_हर जगह का अलग है- सुबह 12:41से दोपहर 02:13pm तक* *🎈सूर्योदय - 06:33:33* *🎈सूर्यास्त - 06:48:06* *🎈चन्द्र राशि - मकर till 15:13:41* *🎈चन्द्र राशि- कुम्भ from 15:13:41* *🎈सूर्य राशि - मीन* *⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में* *⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 04:59 से प्रातः 05:45 तक,* *⛅अभिजीत मुहूर्त - कोई नहीं* *⛅निशिता मुहूर्त - 12:17 ए एम, मार्च 27 से 01:04 ए एम, मार्च 27 तक* *⛅ विशेष- द्वादशी तिथि पर पोई (पूतिका) का साग नहीं खाना चाहिए, ऐसा माना जाता है. पोई (पूतिका) का साग: द्वादशी तिथि में पोई या पूतिका नामक साग का सेवन नहीं करना चाहिए. *🎈व्रत पर्व विवरण - 👉*⛅ विशेष- द्वादशी के दिन चावल खाना बेहद शुभ है, ऐसे में आप खास तौर से पीले चावल खा सकते हैं. माना जाता है कि इससे आप पर और आप के परिवार पर भगवान विष्णु की कृपा बनती है और आप की किस्मत में अच्छे बदलाव आ सकते हैं. इसलिए इस दिन खास तौर से पीले चावल का सेवन जरूर करें. *🛟चोघडिया, दिन🛟* लाभ 06:34 - 08:05 शुभ अमृत 08:05 - 09:37 शुभ काल 09:37 - 11:09 अशुभ शुभ 11:09 - 12:41 शुभ रोग 12:41 - 14:13 अशुभ उद्वेग 14:13 - 15:44 अशुभ चर 15:44 - 17:16 शुभ लाभ 17:16 - 18:48 शुभ
🕉|| घर में टीवी लगाने की सही दिशा कौन सी है? जानें वरना घर में बढ़ेगी कलह और अशांति घर में टीवी लगाने की सही दिशा केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि सुख-शांति बनाए रखने के लिए भी जरूरी है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, गलत दिशा में रखा टीवी परिवार में कलह और तनाव बढ़ा सकता है।
हिन्दू धर्म में जिस तरह ज्योतिष शास्त्र का महत्व है उसी तरह वास्तु शास्त्र का भी विशेष महत्व है। वास्तु शास्त्र हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो हमें यह बताता है कि हर वस्तु को सही दिशा और सही स्थान पर रखना कितना ज़रूरी होता है। वास्तु शास्त्र के बताए गए नियमों का पालन करने से सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।
टीवी हर घर का एक अहम हिस्सा है। जिसकी मदद से परिवार के सदस्य मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञान से भरी जानकारी प्राप्त करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर टीवी को ग़लत दिशा में रखा जाए, तो यह नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकता है। दरअसल, यह इतनी छोटी बात है कि इस पर शायद ही किसी का ध्यान गया हो, वास्तु शास्त्र में टीवी की दिशा को लेकर भी कई नियम बताए गए, अगर हम इन नियमों का पालन करते हैं तो घर में सुख-शांति व समृद्धि बनी रहती है।
क्या बेडरूम में टीवी लगाना सही होता है? अक्सर देखा जाता है कि कई लोग अपने घर के बेडरूम में टीवी लगवा लेते हैं, लेकिन क्या यह वास्तु के अनुसार सही है। जी नहीं, वास्तु शास्त्र के अनुसार बेडरूम में टीवी लगवाना अच्छा नहीं माना जाता है। इसको लेकर ऐसा कहा गया है कि, बेडरूम में टीवी लगाने से पति-पत्नी के रिश्तों में तनाव पैदा होता है, अगर आपके बेडरूम में पहले से ही टीवी लगी हुई है, या फिर आपका बहुत मन है बेडरूम में टीवी लगाने का, तो ऐसे में आपको दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बेडरूम में टीवी लगाने के लिए, दक्षिण-पूर्व दिशा को सबसे शुभ माना जाता है। इस दिशा को अग्नि तत्व की दिशा माना गया है, इस दिशा में टीवी लगाने से नकारात्मक ऊर्जा कम होती है।
इस बात का ख़ास ध्यान रखें कि अगर आपके घर में पुराना या फिर ख़राब टीवी रखा हुआ है, तो उसे तुरंत हटा दें या कि बेच देना चाहिए। ख़राब या बंद टीवी घर में नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकता है, जिससे घर में कलह और तनाव की स्थिति पैदा होती है। इतना ही नहीं, धन आगमन भी रुक जाता है। इसलिए घर की ख़ुशहाली और सकारात्मक उर्जा के लिए ख़राब और बंद टीवी को घर से बाहर निकालना, एक बेहतरीन ऑप्शन हैं।
टीवी किस दिशा में लगाना चाहिए? वास्तु शास्त्र के अनुसार टीवी को हमेशा घर के लिविंग रूम या फिर दूसरे कमरों में लगवाना अच्छा होता है। इस बात का भी ख़ास ध्यान रखें कि एक घर में दो ज़्यादा टीवी न हो तो ज़्यादा अच्छा होगा। अगर आप लिविंग रूम में लगवा रहे हैं, तो दक्षिण-पूर्व दिशा अच्छी मानी जाएगी, दरअसल इस दिशा में टीवी लगाने से बिजली उपकरण भी सही तरीक़े से काम करते हैं। दक्षिण दिशा में टीवी कभी भी नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि यह दिशा यमराज की दिशा मानी जाती है। इस दिशा में लगाने से बचना चाहिए।
🕉️🕉️🕉️🕉️ *☠️🐍जय श्री महाकाल सरकार ☠️🐍*🪷* ▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ *♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।* *अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।* *हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।* *राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...* *👉कामना-भेद-बन्दी-मोक्ष* *👉वाद-विवाद(मुकदमे में) जय* *👉दबेयानष्ट-धनकी पुनः प्राप्ति*। *👉*वाणीस्तम्भन-मुख-मुद्रण* *👉*राजवशीकरण* *👉*शत्रुपराजय* *👉*नपुंसकतानाश/ पुनःपुरुषत्व-प्राप्ति* *👉 *भूतप्रेतबाधा नाश* *👉 *सर्वसिद्धि* *👉 *सम्पूर्ण साफल्य हेतु, विशेष अनुष्ठान हेतु। संपर्क करें।* *♥️रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* *।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 🕉️📿🔥🌞🚩🔱🚩🔥🌞
25 मार्च 2025 यह दिन पापमोचनी एकादशी है। चैत्र नवरात्रि से पहले आने वाली यह एकादशी का महत्व सर्व वर्णित है । उत्तर और दक्षिण भारत में एक ही दिन उसका अनुष्ठान किया जाता रहा है। भगवान श्री विष्णु की कृपा और स्नेह को प्राप्त करने के लिए , शास्त्र में वर्णित घृणित पाप कर्मो की समाप्ति के लिए , और चैत्र नवरात्रि के दौरान श्री महालक्ष्मी की साधना, अनुष्ठान और श्री कर्मो से पहले यह पापमोचनी एकादशी का व्रत किया जाता है। इस एकादशी को सभी संप्रदायों के साधक और जनसमाज को आवाहन है , की अपनी अपनी धार्मिक विधि विधानों सहित , श्री हरी और हर का ध्यान,स्नान और दान करें। ( मनुष्यों को जल का और नीम के रस या पत्तियों या औषधिओ का दान करें, पशुओं को जल और चारे का दान , मत्स्य को भोजन का और पक्षी को जल और दाने का दान सर्वश्रेष्ठ है।) भगवान श्री लक्ष्मीनारायण जी अगर कहीं हो तो उनके दर्शन , सेवा का लाभ ले। अगर आप कुछ न कर पाए तो किसी भी विष्णु या शिव मंदिर में जा कर मंदिर की सफाई में शारीरिक सहयोग दे।
यह वर्ष पापमोचनी एकादशी को एक दुर्लभ शिवयोग बन रहा है। एकादशी के साथ शिव योग और सिद्ध योग का संयोजन हो रहा है। इन योगों के वैष्णव साधकों को भगवान श्री विष्णु या उनके नरसिंह अवतार का सहित जिसमे महामाया लक्ष्मी जी हो वैसे पूजन करना चाइए , और शेव साधक भगवान श्री महादेव का जलाभिषेक , लघु रुद्री या शिव पंचाक्षर मंत्र का जाप करें। यह सभी प्रकार के पाप और दुखों से मुक्त होने का मार्ग साधकों को दिखाएगा ।
25 मार्च 2025 को सुबह 5.04:38 को शुरू हो कर 26 मार्च को सुबह 3.44:59 तक रहेगी। शिव योग का समय 25 मार्च को दोपहर 2.53 तक और सिद्ध योग का समय 26 मार्च सुबह 3.45 तक है। 🕉️🕉️🕉️🕉️ *☠️🐍जय श्री महाकाल सरकार ☠️🐍*🪷* ▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ *♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।* *अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।* *हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।* *राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...* *👉कामना-भेद-बन्दी-मोक्ष* *👉वाद-विवाद(मुकदमे में) जय* *👉दबेयानष्ट-धनकी पुनः प्राप्ति*। *👉*वाणीस्तम्भन-मुख-मुद्रण* *👉*राजवशीकरण* *👉*शत्रुपराजय* *👉*नपुंसकतानाश/ पुनःपुरुषत्व-प्राप्ति* *👉 *भूतप्रेतबाधा नाश* *👉 *सर्वसिद्धि* *👉 *सम्पूर्ण साफल्य हेतु, विशेष अनुष्ठान हेतु। संपर्क करें।* *♥️रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* *।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 🕉️📿🔥🌞🚩🔱🚩🔥🌞
*🎈नक्षत्र - उत्तराषाढा 28:25:52 am रात्रि तत्पश्चात श्रवण* *🎈योग - परिघ 16:43:27 दोपह बाद तक, तत्पश्चात शिव* *🎈करण- वणिज 17:27:01 तत्पश्चात बव * *🎈राहु काल_हर जगह का अलग है- सुबह 08:06से दोपहर 09:38 तक* *🎈सूर्योदय - 06:35:19* *🎈सूर्यास्त - 06:46:07* *🎈चन्द्र राशि- धनु* *🎈चन्द्र राशि- मकर from 10:23:49* *🎈सूर्य राशि - मीन* *⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में* *⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:00 से प्रातः 05:47 तक,* *⛅अभिजीत मुहूर्त - 12:17 पी एम से 01:06 पी एम* *⛅निशिता मुहूर्त - 12:17 ए एम, मार्च 25 से 01:04 ए एम, मार्च 25 मार्च तक* *⛅ विशेष- दशमी के दिन कलंबी नहीं खाना चाहिए। *🎈व्रत पर्व विवरण - 👉*⛅ विशेष- दशमी के दिन दशमी के दिन, खासकर दशहरे के दिन, तामसिक भोजन जैसे मांस, मछली, लहसुन, प्याज और शराब से दूर रहना चाहिए। इसके अलावा, कुछ लोग चने की दाल, मसूर की दाल, साग और दूसरे के घर का खाना भी नहीं खाते. यहाँ दशमी के दिन क्या नहीं खाना चाहिए, इसके बारे में कुछ और जानकारी दी गई है: तामसिक भोजन: दशमी के दिन, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए. मांस, मछली, लहसुन, प्याज और शराब: इन चीजों का सेवन दशमी के दिन नहीं करना चाहिए. चने की दाल, मसूर की दाल, साग: कुछ लोग इन चीजों का सेवन दशमी के दिन नहीं करते. दूसरे के घर का खाना: कुछ लोग दशमी के दिन दूसरे के घर का खाना भी नहीं खाते. कांस के बर्तन में खाना: कुछ लोग कांसे के बर्तन में खाना खाने से भी परहेज करते हैं. फास्ट फूड: दशम पर फास्ट फूड का सेवन टालना चाहिए. कुछ अन्य चीजें: कुछ लोग दशमी के दिन सरसों का साग और मूली जैसी सब्जियों को खाने से भी परहेज करते हैं. ध्यान दें: ये सभी बातें धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं और हर व्यक्ति को अपनी मान्यताओं के अनुसार निर्णय लेने का अधिकार है. *🛟चोघडिया, दिन🛟* अमृत 06:35 - 08:06 शुभ काल 08:06 - 09:38 अशुभ शुभ 09:38 - 11:09 शुभ रोग 11:09 - 12:41 अशुभ उद्वेग 12:41 - 14:12 अशुभ चर 14:12 - 15:43 शुभ लाभ 15:43 - 17:15 शुभ अमृत 17:15 - 18:46 शुभ
🕉हां जी, आज बात करेंगे "जन्मकुंडली में चिकित्सक बनने के योग" की! !👈
🔥 ♦️जन्मकुंडली में चिकित्सक बनने के योग ================================= डॉक्टरी एक ऐसा कैरियर और रोजगार का क्षेत्र है जहाँ अच्छा खासा सम्मान, धन रुतवा आदि सब होता है लेकिन क्या बहुत काबिल/सफल डॉक्टर बन पाएंगे या नही और क्या नामी डॉक्टर रहेंगे या सामान्य आज अब इसी विषय पर बात करते है, क्योंकि डॉक्टरी करने के बाद डॉक्टर तो आप बन सकते है लेकिन डॉक्टरी के क्षेत्र में आपका कैरियर कैसा रहेगा?यह सबसे महत्वपूर्ण बात है। 🔸कुंडली का दसवाँ भाव कैरियर/रोजगार साथ ही पद, प्रतिष्ठा, सम्मान, प्रसिद्धि आदि जैसे विषयों का है तो छठा भाव और इसका स्वामी डॉक्टरी क्षेत्र से सम्बंधित है तो नवग्रहों में हर एक ग्रह किसी न किसी डॉक्टरी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है कि व्यक्ति किस मर्ज का डॉक्टर बनेगा। 🔸जब भी लग्न कुंडली या दशमांश कुंडली मे दसवे भाव या दसवे भाव स्वामी का सम्बन्ध छठे भाव या छठे भाव स्वामी से अच्छी स्थिति में बनेगा और शिक्षा के योग अच्छे होंगे साथ ही शिक्षा सम्बन्धित ग्रहों(पाचवे या नवे भाव स्वामी/शिक्षा स्वामी)ग्रहों का सम्बन्ध भी छठे भाव या दसवे भाव से होगा तब ऐसा जातक/जातिका डॉक्टरी के क्षेत्र में अच्छी सफलता प्राप्त करेंगे साथ ही दसवाँ भाव और इसका स्वामी और जातक/जातिका का लग्न या लग्नेश जितना ज्यादा शुभ योगों और बलवान स्थिति में होगा तब ऐसे जातक/जातिका प्रसिद्ध/नामी(Famous) डॉक्टर बनेंगे क्योंकि यह शुभ योगों का लग्न/लग्नेश और दसवे भाव/दसवे भाव स्वामी पर प्रभाव सफलता डॉक्टर बनाएगा जिससे जातक/जातिका की प्रसिद्धि बढ़ती जाएगी। 👉इसे इस प्रकार से समझते हैं कैसे❓❓ 🔸मेष लग्न के जन्मकुंडली में जैसे दसवे भाव का स्वामी शनि बनता है और छठे भाव का स्वामी बुध बनता है अब दसवे भाव स्वामी शनि यहाँ छठे भाव मे छ्ठे भाव स्वामी बुध के साथ ही कन्या राशि मे बैठे तब जातक/जातिका सफल डॉक्टर बन जायेंगे और अब यहाँ लग्नेश मंगल होता है अब मंगल दसवे भाव मे बैठ जाये शिक्षा स्वामी सूर्य के साथ तो मेष में दसवे भाव मे मंगल उच्च+दिग्बली होने से बहुत बलवान होता है अब ऐसी स्थिति में जातक/जातिका नामी/प्रसिद्ध डॉक्टर बनेगे जो कि दूर दूर तक नाम डॉक्टरी में होगा।। 🔸कर्क लग्न के जन्मकुंडली में जैसे दसवे भाव(कैरियर/रोजगार) का स्वामी मंगल तो छठे भाव(डॉक्टरी क्षेत्र) का स्वामी गुरु बनता है अब मंगल और गुरु यहाँ बलवान स्थिति में छठे, बारहवे, दसवे भाव या किसी भी अच्छे भाव मे सम्बन्ध कर ले तब जातक/जातिका बहुत सफल डॉक्टर बनेगे क्योंकि मंगल गुरू सम्बन्ध होने से यहाँ कर्क लग्न में राजयोग भी बनता है।अब इन्ही मंगल गुरु के साथ यहाँ लग्नेश मतलब लग्न स्वामी चन्द्रमा का भी सम्बन्ध बन जाये तब ऎसे जातक/जातिका प्रसिद्ध/नामी और बहुत सफल डॉक्टर होंगे क्योंकि यह स्थिति नामी/प्रसिद्ध और सफल डॉक्टर बनाएगी।। 👉 अब डॉक्टरी में स्वयंम का क्लीनिक/अस्पताल खुलेगा या डॉक्टर बनकर डॉक्टरी के क्षेत्र में नौकरी करनी पड़ेगी इसके लिए दसवे भाव का सम्बन्ध जब सातवे भाव सहित 11वे या दूसरे भाव से होगा और बुध अधिक से अधिक बलवान होगा तब स्वयम का क्लीनिक या अस्पताल होता है पर ऐसी स्थिति न हो तब डॉक्टरी में डॉक्टर बनाकर जॉब करेंगे।। 🕉️🕉️🕉️🕉️ *☠️🐍जय श्री महाकाल सरकार ☠️🐍*🪷* ▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ *♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।* *अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।* *हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।* *राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...* *👉कामना-भेद-बन्दी-मोक्ष* *👉वाद-विवाद(मुकदमे में) जय* *👉दबेयानष्ट-धनकी पुनः प्राप्ति*। *👉*वाणीस्तम्भन-मुख-मुद्रण* *👉*राजवशीकरण* *👉*शत्रुपराजय* *👉*नपुंसकतानाश/ पुनःपुरुषत्व-प्राप्ति* *👉 *भूतप्रेतबाधा नाश* *👉 *सर्वसिद्धि* *👉 *सम्पूर्ण साफल्य हेतु, विशेष अनुष्ठान हेतु। संपर्क करें।* *♥️रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* *।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 🕉️📿🔥🌞🚩🔱🚩🔥🌞
*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक - 23 मार्च 2025* *🎈दिन - रविवार* *🎈विक्रम संवत् - 2081* *🎈अयन - उत्तरायण* *🎈ऋतु - बसन्त* *🎉मास - चैत्र* *🎈पक्ष- कृष्ण* *🎈तिथि - नवमी 29:37:29 am तत्पश्चात दशमी* *🎈नक्षत्र - पूर्वाषाढा 28:17:17 am रात्रि तत्पश्चात उत्तराषाढा* *🎈योग - वरियान 17:57:27 शाम तक, तत्पश्चात परिघ* *🎈करण- तैतुल 17:36:01 तत्पश्चात वणिज * *🎈राहु काल_हर जगह का अलग है- सुबह 09:39से दोपहर 11:10 तक* *🎈सूर्योदय - 06:36:09* *🎈सूर्यास्त - 06:45:43* *🎈चन्द्र राशि- धनु* *🎈सूर्य राशि - मीन* *⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में* *⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:01 से प्रातः 05:48 तक,* *⛅अभिजीत मुहूर्त - 12:17 पी एम से 01:06 पी एम* *⛅निशिता मुहूर्त - 12:18 ए एम, मार्च 24 से 01:05 ए एम, मार्च 234 तक* *⛅ विशेष- नवमी के दिन लौकी खाने से, ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, बुद्धि का नाश होता है, इसे गोमांस के समान त्याज्य माना गया है। *🎈व्रत पर्व विवरण - 👉*⛅ विशेष- आंवले के वृक्ष के नीचे करें भोजन नवमी के दिन आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन करने के साथ प्रसाद के रूप में आंवला खाने और वितरण करने की भी मान्यता है। ऐसा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और परिवार में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है। *🛟चोघडिया, दिन🛟* उद्वेग 06:36 - 08:07 अशुभ चर 08:07 - 09:39 शुभ लाभ 09:39 - 11:10 शुभ अमृत 11:10 - 12:41 शुभ काल 12:41 - 14:12 अशुभ शुभ 14:12 - 15:43 शुभ रोग 15:43 - 17:15 अशुभ उद्वेग 17:15 - 18:46 अशुभ
♥️🙏धन कुबेर को प्रसन्न करे– नया खेल शुरू करे! :-🙏♥️
🕉हां जी, आज बात करेंगे " धन कुबेर" की! !👈
🔥 Kesar Pani Totka 🔥 सनातन धर्म में मां लक्ष्मी को धन की देवी कहा गया है. कहते हैं कि जिस किसी पर मां लक्ष्मी का विशेष आशीर्वाद रहता है, उसके जीवन में धन-दौलत की कोई कमी नहीं होती है. ऐसे लोगों का जीवन में लक्ष्मी की कृपा से सुखमय बना रहता है. हालांकि, कई बार धन आने के पास भी रुकता नहीं है. वहीं, कुछ लोग दिन-रात कठिन परिश्रम करने के बाद भी मन के अनुकूल धन प्राप्त नहीं कर पाते. ज्योतिष शास्त्र में धन प्राप्ति के लिए कई उपाय बताए गए हैं. ये उपाय धन-दौलत में वृद्धि करते हैं. ऐसे में चलिए जानते हैं बेशुमार धन-दौलत के लिए केसर-पानी का चमत्कारी टोटका।
💕केसर-पानी का चमत्कारी टोटका✨
🌼शास्त्रों में केसर और जल से मिश्रण को गंधोदक कहा गया है. कई प्रसिद्ध मंदिरों में केसर से भगवान का अभिषेक किया जाता है. ज्योतिष शास्त्र के जानकार बताते हैं कि केसर में जल डालकर किसी भी देवता का अभिषेक करने पर वे धन देने के लिए बाध्य हो जाते हैं. देवी-देवताओं को धन देवा पड़ता है. इस उपाय को करने से जबरदस्त धन लाभ होता है.💥
💥कैसे करें केसर-पानी का टोटका?🎉
🎉शास्त्रों में धन की देवी लक्ष्मी को चंचला कहा गया है. वो एक स्थान पर अधिक समय तक नहीं ठहरती हैं. इसलिए स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए उपाय किए जाते हैं, ताकि हमेशा मां लक्ष्मी की कृपा मिलती रहे. ऐसे में धन प्राप्ति और मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए किसी बर्तन में जल भर लें और उसमें केसर मिला दें. ध्यान रहे कि केसर की मात्रा इतनी होनी चाहिए कि वह पानी केसर के रंग का हो जाए. केसर-पानी तैयार करने के बाद उससे धन के देवता कुबेर का अभिषेक करें. इसके साथ ही कुबेर की मूर्ति को किसी थाली में रखें. इसके बाद केसर के पानी से कुबेर का जलाभिषेक करें. कहा जाता है कि केसर-पानी के इस टोटके से धन-दौलत में बेशुामर वृद्धि होती है.🛟
🛟कुबेर मंत्र🛟
🎈केसर के उपाय के अलावा आप धन प्राप्ति के लिए कुबेर के इस मंत्र का जाप कर सकते हैं. इससे आपके सुख और सुविधाओं में भी बढ़ोत्तरी हो सकती है. कुबेर 🎈मंत्र- ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः.🎈
🌤️अष्ट लक्ष्मी कुबेर मंत्र🌙
🌤️अष्ट लक्ष्मी कुबेर मंत्र का जाप करने से मां लक्ष्मी और कुबेर देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. अष्ट लक्ष्मी कुबेर मंत्र- ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः.🌤️
🕉️🕉️🕉️🕉️ *☠️🐍जय श्री महाकाल सरकार ☠️🐍*🪷* ▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ *♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।* *अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।* *हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।* *राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...* *👉कामना-भेद-बन्दी-मोक्ष* *👉वाद-विवाद(मुकदमे में) जय* *👉दबेयानष्ट-धनकी पुनः प्राप्ति*। *👉*वाणीस्तम्भन-मुख-मुद्रण* *👉*राजवशीकरण* *👉*शत्रुपराजय* *👉*नपुंसकतानाश/ पुनःपुरुषत्व-प्राप्ति* *👉 *भूतप्रेतबाधा नाश* *👉 *सर्वसिद्धि* *👉 *सम्पूर्ण साफल्य हेतु, विशेष अनुष्ठान हेतु। संपर्क करें।* *♥️रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* *।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 🕉️📿🔥🌞🚩🔱🚩🔥🌞
*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक - 22 मार्च 2025* *🎈दिन - शनिवार* *🎈विक्रम संवत् - 2081* *🎈अयन - उत्तरायण* *🎈ऋतु - बसन्त* *🎉मास - चैत्र* *🎈पक्ष- कृष्ण* *🎈तिथि - अष्टमी 29:22:49am am तत्पश्चात नवमी* *🎈नक्षत्र - मूल 27:22:33am रात्रि तत्पश्चात पूर्वाषाढा* *🎈योग - व्यतिपत 18:35:14 शाम तक, तत्पश्चात वरियान* *🎈करण- बालव 16:58:21 तत्पश्चात तैतुल * *🎈राहु काल_हर जगह का अलग है- सुबह 09:39से दोपहर 11:10 तक* *🎈सूर्योदय - 06:37:14* *🎈सूर्यास्त - 06:45:14* *🎈चन्द्र राशि वृश्चिक till 25:44:48* *🎈चन्द्र राशि- धनु* *🎈सूर्य राशि - मीन* *⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में* *⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:02 से प्रातः 05:49 तक,* *⛅अभिजीत मुहूर्त - 12:18 पी एम से 01:06 पी एम* *⛅निशिता मुहूर्त - 12:18 ए एम, मार्च 23 से 01:05 ए एम, मार्च 23 तक*
*⛅ विशेष- अष्टमी के दिन खासकर क्या खान पान हो स्नान संतान सप्तमी या शीतला सप्तमी के दौरान, नमक, लहसुन, प्याज, मांस, मछली और अनाज जैसे चावल और गेहूं से बने भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए. *🎈व्रत पर्व विवरण - 👉*⛅ विशेष- शीतला अष्टमी के दिन गरम भोजन न करें शीतला अष्टमी के दिन गरम भोजन या चाय का सेवन वर्जित माना जाता है, क्योंकि इस दिन ठंडा और बासी भोजन ग्रहण करने की परंपरा है। मान्यता है कि गर्म भोजन करने से माता शीतला अप्रसन्न हो सकती हैं, जिससे परिवार पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है और रोगों का खतरा बढ़ सकता है। *🛟चोघडिया, दिन🛟* काल 06:37 - 08:08 अशुभ शुभ 08:08 - 09:39 शुभ रोग 09:39 - 11:10 अशुभ उद्वेग 11:10 - 12:41 अशुभ चर 12:41 - 14:12 शुभ लाभ 14:12 - 15:43 शुभ अमृत 15:43 - 17:14 शुभ काल 17:14 - 18:45 अशुभ *🔵चोघडिया, रात🔵 लाभ 18:45 - 20:14 शुभ उद्वेग 20:14 - 21:43 अशुभ शुभ 21:43 - 23:12 शुभ अमृत 23:12 - 24:41* शुभ चर 24:41* - 26:10* शुभ रोग 26:10* - 27:38* अशुभ काल 27:38* - 29:07* अशुभ लाभ 29:07* - 30:36* शुभ
♥️🙏 कुबेर को प्रसन्न करे– नया खेल शुरू करे! :-🙏♥️
🕉हां जी, आज बात करेंगे " धन कुबेर" की! !👈 🔥 कनक धारा–सिर्फ नाम ही काफी है वैभवशाली जीवन के लिए🙏
🔥 अंगारक योग के उपाय 🔥
अंगारक योग, जो राहु और मंगल की युति से बनता है, के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए हनुमान जी की पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ, राहु और मंगल के मंत्रों का जप, और बंदरों को भोजन कराना जैसे उपाय बताए गए हैं. अंगारक योग के उपाय: हनुमान जी की पूजा: मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करें, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, सुंदरकांड और हनुमाष्ट का पाठ करें. राहु और मंगल के मंत्रों का जप: प्रतिदिन राहु और मंगल के मंत्रों का जाप करें. व्रत: अंगारक योग से बचने के लिए 21 या 45 मंगलवार तक व्रत रखें. दान: मंगलवार को मसूर दाल, लाल रंग के कपड़े और लाल मिर्च आदि चीजों का दान करें. हनुमान चालीसा का पाठ: रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ करें. बंदरों को भोजन कराएं: मंगलवार को बंदरों को भोजन कराएं. चांदी का कड़ा: चांदी का कड़ा पहनें. गाय को गुड़ दें: मंगलवार को गाय को गुड़ खाने को दें. हाथी दांत रखें: घर में हाथी दांत रखने से इसकी अशुभ स्थिति कम होती है. मुल्तानी मिट्टी: मुल्तानी मिट्टी से बाल और चेहरा धोएं. सूर्य को जल अर्पित करें: मिथुन, तुला या कुंभ राशि वाले लोग रोज सुबह सूर्य को जल में लाल फूल डालकर अर्पित करें. तांबे का सिक्का: तांबे का छेद वाला सिक्का लाल धागे में डालकर गले में पहनें. ध्यान और वाणी पर संयम: हर दिन ध्यान करें और अपनी वाणी पर संयम रखें. नकारात्मक विचारों से दूर रहें: नकारात्मक विचारों से दूर रहें. घायल गाय व कुत्ते का उपचार कराएं: घायल गाय व कुत्ते का उपचार कराएं. शनिवार को काली उड़द की दाल दान करें: शनिवार को काली उड़द की दाल दान करें. महामृत्युंजय मंत्र का जप करें: रोजाना महामृत्युंजय मंत्र का जप करें. बजरंगबली के पैर का सिंदूर: बजरंगबली के पैर का सिंदूर अपने माथे पर लगाएं. पूजा स्थल पर यंत्रों की स्थापना: पूजा स्थल पर राहु और मंगल के यंत्रों की स्थापना करके विधि-विधान से पूजा करें. *☠️🐍जय श्री महाकाल सरकार ☠️🐍*🪷* ▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ *♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।* *अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।* *हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।* *राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...* *👉कामना-भेद-बन्दी-मोक्ष* *👉वाद-विवाद(मुकदमे में) जय* *👉दबेयानष्ट-धनकी पुनः प्राप्ति*। *👉*वाणीस्तम्भन-मुख-मुद्रण* *👉*राजवशीकरण* *👉*शत्रुपराजय* *👉*नपुंसकतानाश/ पुनःपुरुषत्व-प्राप्ति* *👉 *भूतप्रेतबाधा नाश* *👉 *सर्वसिद्धि* *👉 *सम्पूर्ण साफल्य हेतु, विशेष अनुष्ठान हेतु। संपर्क करें।* *♥️रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* *।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 🕉️📿🔥🌞🚩🔱🚩🔥🌞
*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक - 21 मार्च 2025* *🎈दिन - शुक्रवार* *🎈विक्रम संवत् - 2081* *🎈अयन - उत्तरायण* *🎈ऋतु - बसन्त* *🎉मास - चैत्र* *🎈पक्ष- कृष्ण* *🎈तिथि - सप्तमी 04:23:15 am तत्पश्चात अष्टमी* *🎈नक्षत्र - ज्येष्ठा 25:44:48 रात्रि तत्पश्चात मूल* *🎈योग - सिद्वि 18:40:20 तक, तत्पश्चात व्यतिपत* *🎈करण- विष्टि भद्र 15:38:22 तत्पश्चात बालव * *🎈राहु काल_हर जगह का अलग है- सुबह 11:11से दोपहर 12:42 तक* *🎈सूर्योदय - 06:38:20* *🎈सूर्यास्त - 06:44:44* *🎈चन्द्र राशि वृश्चिक till 25:44:48* *🎈चन्द्र राशि धनु from 25:44:48* *🎈सूर्य राशि - मीन* *⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में* *⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:03 से प्रातः 05:50 तक,* *⛅अभिजीत मुहूर्त - 12:18 पी एम से 01:07 पी एम* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:18 ए एम, मार्च 22 से 01:05 ए एम, मार्च 22 तक* *⛅ विडाल योग- 06:38 ए एम से 01:46 ए एम, मार्च 22 तक *⛅ विशेष- सप्तमी के दिन, खासकर संतान सप्तमी या शीतला सप्तमी के दौरान, नमक, लहसुन, प्याज, मांस, मछली और अनाज जैसे चावल और गेहूं से बने भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए. *🎈व्रत पर्व विवरण - 👉*⛅ विशेष- सप्तमी : सप्तमी के दिन ताड़ का फल खाना निषेध है। इसको इस दिन खाने से रोग होता है। *🛟चोघडिया, दिन🛟* चर 06:38 - 08:09 शुभ लाभ 08:09 - 09:40 शुभ अमृत 09:40 - 11:11 शुभ काल 11:11 - 12:42 अशुभ शुभ 12:42 - 14:12 शुभ रोग 14:12 - 15:43 अशुभ उद्वेग 15:43 - 17:14 अशुभ चर 17:14 - 18:45 शुभ *🔵चोघडिया, रात🔵 रोग 18:45 - 20:14 अशुभ काल 20:14 - 21:43 अशुभ लाभ 21:43 - 23:12 शुभ उद्वेग 23:12 - 24:41* अशुभ शुभ 24:41* - 26:10* शुभ अमृत 26:10* - 27:39* शुभ चर 27:39* - 29:08* शुभ रोग 29:08* - 30:37* अशुभ
♥️🙏 शुक्र देव का राशि परिवर्तन – नया खेल शुरू! :-🙏♥️
🕉हां जी, आज बात करेंगे " शुक्र देव" की! !👈 🔥शुक्र –सिर्फ नाम ही काफी है वैभवशाली जीवन के लिए🙏
इस महीने के अंत में शनि राशि परिवर्तन करेंगे लेकिन इसके पहले दैत्य गुरु शुक्र अपनी राशि बदलने जा रहे हैं। शुक्र के अस्त होते ही आज से शुभ कामों पर रोक लग जाएगी। आपको बता दें ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार शुक्र बहुत कम समय के लिए अस्त हो रहे हैं।
मार्च में शुक्र कब से कब तक अस्त रहेंगे, शुक्र का गोचर राशियों पर क्या असर दिखाएगा। पंचांग में शुक्र कब उच्च राशि में प्रवेश करेंगे। साथ ही जानेंगे शुक्र के उपाय क्या हैं।
19 मार्च को शुक्र का अस्त
पंचांग के अनुसार शुक्र इस बार 19 मार्च बुधवार यानि आज अस्त हो रहे हैं. जो बेहद कम समय के लिए अस्त होंगे. इसी के साथ आज से सभी तरह के शुभ काम बंद हो जाएंगे.
23 अप्रैल से उच्च के हो जाएंगे शुक्र
हिन्दू पंचांग के अनुसार सुख के कारक शुक्र 23 अप्रैल को अपनी उच्च राशि मीन में प्रवेश करेंगे। जो 31 मई तक इसी राशि में रहेंगे। ज्योतिष में कोई भी ग्रह जब अपनी उच्च राशि में प्रवेश करता है तो वह सभी जातकों के लिए लिए शुभ फल देने लगता हैं
उच्च के शुक्र से देश पर क्या असर होगा
ज्योतिष में शुक्र गोचर का राशि परिवर्तन बेहद खास माना जाता है। शुक्र के उच्च राशि मीन में गोचर करने पर सांसारिक सुखों में वृद्धि होगी। लोगों सुख के कार्यों में व्यय करेंगे।
मार्च से बदलेगी शुक्र की चाल
शुक्र का लटकन ज्योतिषीय गणना के अनुसार 27 मार्च तक शुक्र कुंभ राशि में वक्री रहेंगे। 27 मार्च से कुंभ राशि में ही मार्गी हो जाएंगे। इसके बाद 23 अप्रैल को मार्गी चाल चलते हुए मीन राशि में पहुंचेंगे। चूंकि मीन शुक्र की उच्च राशि है इसलिए इस राशि में पहुंचकर ये उच्च के हो जाएंगे। जो 31 मई तक इसी राशि में गोचर करेंगे।
मिथुन राशि पर शुक्र अस्त का असर
शुक्र अस्त होकर मिथुन राशि वालों के जीवन में बदलाव लेकर आएगा। इन जातकों के परिवार, करियर, पैसों और सेहत पर सकारात्मक बदलाव देखनें को मिलेंगे।
हो सकता है परिवार में किसी नए मेहमान का आगमन हो जाए। अगर आप नौकरीपेशा हैं तो आपको कुछ नए आफर मिल सकते हैं। पैसों को लेकर लापरवाही न करें। आपको कमाई के अच्छे मौके मिल सकते हैं। अगर आप विवाहित हैं तो पति-पत्नी के रिश्तों में नजदीकियां बढ़ेगीं। मां की सेहत का ध्यान देने की सलाह आपको दी जा रही है।
सिंह राशि पर शुक्र अस्त का असर
सिंह राशि के जातकों पर अस्त शुक्र चुनौतियां लेकर आ सकता है। इनके प्रभाव से आपका साहस, संकल्प, करियर, व्यापार, रिश्तों और सेहत पर पड़ सकता है। हालांकि ये समय आपके लिए विकास की नई राह खोलेगा।
यदि आप नौकरीपेशा हैं तो आपको कार्यक्षेत्र में बड़ा बदलाव देखनें को मिल सकता है। आपको जॉब में कई सुनहरे मौके मिल सकते हैं। अगर आप व्यापारी हैं तो आपको व्यापार में विरोधियों से कड़ी टक्कर मिल सकती है।
हालांकि इस दौरान आपका व्यापार बढ़ेगा। यदि लव लाइफ में हैं तो आपको प्यार के मामले में भी दिन सौभाग्यशाली रहेगा। अगर आप अविवाह हैं तो आपको विवाह के रिश्ते मिल सकते हैं।
शुक्र अस्त किसके लिए शुभ रहेंगे इसके अलावा तुला, धनु और कुंभ के लिए शुक्र अस्त होकर लाभ दिलाएंगे।
शुक्र के उपाय
शुक्रवार का व्रत रखें। शुक्रवार को सफ़ेद रंग के कपड़े पहनें। शुक्रवार को सफ़ेद चीज़ों का दान करें। शुक्र के मंत्र ‘ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः’ का जाप करें। शुक्र यंत्र को घर में स्थापित करें और नियमित रूप से इसकी पूजा करें। शुक्र को मज़बूत करने के लिए हीरा या जरकन रत्न धारण करें। मां लक्ष्मी की पूजा करें। सफ़ेद गाय को चारा खिलाएं। शुक्रवार को अपने शरीर पर चंदन का लेप लगाएं। शुक्रवार को भगवान शिव की सफ़ेद फूलों से पूजा करें। सफ़ेद स्फटिक की माला पहनें।
*☠️🐍जय श्री महाकाल सरकार ☠️🐍*🪷* ▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ *♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।* *अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।* *हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।* *राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...* *👉कामना-भेद-बन्दी-मोक्ष* *👉वाद-विवाद(मुकदमे में) जय* *👉दबेयानष्ट-धनकी पुनः प्राप्ति*। *👉*वाणीस्तम्भन-मुख-मुद्रण* *👉*राजवशीकरण* *👉*शत्रुपराजय* *👉*नपुंसकतानाश/ पुनःपुरुषत्व-प्राप्ति* *👉 *भूतप्रेतबाधा नाश* *👉 *सर्वसिद्धि* *👉 *सम्पूर्ण साफल्य हेतु, विशेष अनुष्ठान हेतु। संपर्क करें।* *♥️रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* *।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 🕉️📿🔥🌞🚩🔱🚩🔥🌞
*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक - 20 मार्च 2025* *🎈दिन - गुरुवार* *🎈विक्रम संवत् - 2081* *🎈अयन - उत्तरायण* *🎈ऋतु - बसन्त* *🎉मास - चैत्र* *🎈पक्ष- कृष्ण* *🎈तिथि - षष्ठी 02:44:48 am तत्पश्चात सप्तमी* *🎈नक्षत्र - अनुराधा रात्रि 23:30:37 तत्पश्चात ज्येष्ठा* *🎈योग - वज्र 18:18:24 तक, तत्पश्चात सिद्वि* *🎈करण- गर 13:43:42 तत्पश्चात विष्टि भद्र * *🎈राहु काल_हर जगह का अलग है- सुबह 02:12से दोपहर 03:43 तक* *🎈सूर्योदय - 06:39:26* *🎈सूर्यास्त - 06:44:14* *🎈चन्द्र राशि- वृश्चिक* *🎈सूर्य राशि - मीन* *⛅दिशा शूल - दक्षिण दिशा में* *⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:04 से प्रातः 05:51 तक,* *⛅अभिजीत मुहूर्त - 12:18 पी एम से 01:07 पी एम* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:18 ए एम, मार्च 21 से 01:06 ए एम, मार्च 21 तक* *⛅ रवि योग - सुबह 11:31 पी एम से 06:38 ए एम, मार्च 21 *⛅ विशेष- रंग पंचमी के व्रत में कई तरह के खाने से बचना चाहिए, जैसे कि मांसाहारी भोजन, तली हुई चीज़ें, प्याज़-लहसुन, *🎈व्रत पर्व विवरण - 👉*⛅ विशेष- षष्ठी तिथि को, खासकर षष्ठी के व्रत में, हल से जोती हुई वस्तुएं, गाय का दूध और उससे बने पदार्थ, तथा तामसिक भोजन (जैसे मांस, मछली, अंडे) नहीं खाने चाहिए. *🛟चोघडिया, दिन🛟* शुभ 06:39 - 08:10 शुभ रोग 08:10 - 09:41 अशुभ उद्वेग 09:41 - 11:11 अशुभ चर 11:11 - 12:42 शुभ लाभ 12:42 - 14:12 शुभ अमृत 14:12 - 15:43 शुभ काल 15:43 - 17:14 अशुभ शुभ 17:14 - 18:44 शुभ *🔵चोघडिया, रात🔵 अमृत 18:44 - 20:14 शुभ चर 20:14 - 21:43 शुभ रोग 21:43 - 23:12 अशुभ काल 23:12 - 24:41* अशुभ लाभ 24:41* - 26:11* शुभ उद्वेग 26:11* - 27:40* अशुभ शुभ 27:40* - 29:09* शुभ अमृत 29:09* - 30:38* शुभ
♥️🙏 राहु देव का राशि परिवर्तन – नया खेल शुरू! :-🙏♥️
🕉हां जी, आज बात करेंगे "राहु देव" की! !👈 🔥राहु –सिर्फ नाम ही काफी है🙏
"आधा शरीर, मगर असर पूरा! यह राहु है, साहब!" जो दिखता नहीं, वही सबसे ज्यादा असर करता है… और 18 मई 2025, शाम 4:30 बजे, यही छुपा हुआ खिलाड़ी राशि परिवर्तन कर रहा है! अब ये किसकी ज़िंदगी में खेल करेगा और किसे खिलाड़ी बनाएगा, आइए जानते हैं!
राहु कोई साधारण ग्रह नहीं, बल्कि छल, चतुराई, रहस्य और अनदेखी शक्ति का देवता है। इसे आप रहस्यमयी योजनाओं का मास्टरमाइंड कह सकते हैं! आधा शरीर होने के बावजूद यह पूरे जीवन पर राज करता है – कभी अवसर की बारिश कराता है, तो कभी भ्रम की आंधी ला देता है!
⚡️ राहु देव का राशि परिवर्तन – नया खेल शुरू! ⚡️ कुंभ में राहु – जब लॉजिक और भ्रम का संगम होगा!
🔹 राहु यहां एकदम एक्टिव मोड में रहेंगे! 🔹 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइंस, रिसर्च, और डिजिटल क्रांति तेज होगी! 🔹 राहु कुंभ में होते ही नया खेल शुरू – कुछ को अपार सफलता तो कुछ को भारी उलझन! 🔹 लेकिन याद रहे, कुंभ में राहु लॉजिक मांगते हैं – इमोशन्स में बहने का समय नहीं है! "रहस्यमयी, चालाक, और अदृश्य… मगर असर ऐसा कि पूरी ज़िंदगी बदल दे!" राहु देव अपनी राशि बदलने जा रहे हैं! मीन से कुंभ में प्रवेश करेंगे, और इनके साथ ही केतु सिंह राशि में दस्तक देंगे!
अब सवाल यही है – यह परिवर्तन आपको ऊँचाइयों तक ले जाएगा या भ्रम की भूलभुलैया में फंसा देगा? आइए जानते हैं!
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🔥 राहु – जब तक समझें, तब तक खेल बदल चुका होता है!
राहु देव कोई सीधा-सादा ग्रह नहीं, बल्कि छल, चतुराई, टेक्नोलॉजी, साइंस, रिसर्च और अनदेखी शक्तियों का राजा है! कुंभ राशि में प्रवेश करते ही यह विज्ञान, क्रांतिकारी विचारों और भविष्य की योजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। लेकिन ध्यान रहे, यह ग्रह सीधा नहीं चलता!
✨ कौन से लोग चमकेंगे?
✅ टेक्नोलॉजी, साइंस, रिसर्च, डिजिटल मार्केटिंग, क्रिप्टो और इनोवेशन से जुड़े लोग – यह समय आपके लिए बूस्टर की तरह होगा! ✅ बिजनेस करने वालों के लिए नए आइडियाज और ग्लोबल कनेक्शन के मौके मिल सकते हैं। ✅ विदेश जाने, वीज़ा अप्लाई करने, और अप्रत्याशित सफलता के योग बन सकते हैं। ✅ तंत्र-मंत्र, गुप्त विद्या, ज्योतिष और रिसर्च से जुड़े लोगों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण होगा।
⚠️ किनको सावधान रहना चाहिए?
🚨 भावनाओं में बहने वाले लोग भ्रम में फंस सकते हैं – हर चीज़ पर शक होगा, और सच-झूठ में फर्क करना मुश्किल होगा। 🚨 विवाह, पार्टनरशिप और रिलेशनशिप में अचानक तनाव बढ़ सकता है – शक और गलतफहमी से बचें! 🚨 नौकरी बदलने, बिजनेस में बड़ा रिस्क लेने और गलत संगति में पड़ने से बचें – राहु अपने झूठे सपनों में फंसाकर गिरा भी सकता है!
🚨 केतु सिंह राशि में जाएगा, मतलब अहंकार, गुस्सा और ईगो की वजह से रिश्तों में कड़वाहट आ सकती है।
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🛠 अब राहु देव को शांत कैसे करें? (उपाय ज़रूरी है!)
🔮 "राहु – छलावा या चमत्कार?"
अब सवाल यह है – क्या आप इस बदलाव के लिए तैयार हैं, या राहु आपको अपने जाल में फंसा लेगा? सही निर्णय लें, सही मार्गदर्शन लें और रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश प्रेमजी के साथ अपनी राह तय करें!
राहु बदल रहा है… लेकिन क्या आप भी बदलने के लिए तैयार हैं? 🚀
*☠️🐍जय श्री महाकाल सरकार ☠️🐍*🪷* ▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ *♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।* *अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।* *हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।* *राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...* *👉कामना-भेद-बन्दी-मोक्ष* *👉वाद-विवाद(मुकदमे में) जय* *👉दबेयानष्ट-धनकी पुनः प्राप्ति*। *👉*वाणीस्तम्भन-मुख-मुद्रण* *👉*राजवशीकरण* *👉*शत्रुपराजय* *👉*नपुंसकतानाश/ पुनःपुरुषत्व-प्राप्ति* *👉 *भूतप्रेतबाधा नाश* *👉 *सर्वसिद्धि* *👉 *सम्पूर्ण साफल्य हेतु, विशेष अनुष्ठान हेतु। संपर्क करें।* *♥️रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* *।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 🕉️📿🔥🌞🚩🔱🚩🔥🌞
*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक - 19 मार्च 2025* *🎈दिन - बुधवार* *🎈विक्रम संवत् - 2081* *🎈अयन - उत्तरायण* *🎈ऋतु - बसन्त* *🎉मास - चैत्र* *🎈पक्ष- कृष्ण* *🎈तिथि - पंचमी 24:36:25 am तत्पश्चात षष्ठी* *🎈नक्षत्र - विशाखा 20:49:07 तत्पश्चात अनुराधा* *🎈योग - हर्शण 17:36:33 तक, तत्पश्चात वज्र* *🎈करण- कौलव 11:24:18 तत्पश्चात गर * *🎈राहु काल_हर जगह का अलग है- सुबह 12:42से दोपहर 02:15 तक* *🎈सूर्योदय - 06:40:31* *🎈सूर्यास्त - 06:43:44* *🎈चन्द्र राशि- तुला till 14:05:42* *🎈चन्द्र राशि- वृश्चिक from 14:05:42* *🎈सूर्य राशि - मीन* *⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में* *⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:05 से प्रातः 05:52 तक,* *⛅अभिजीत मुहूर्त - कोई नहीं* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि12:19 ए एम, मार्च 20 से 01:06 ए एम, मार्च 20 तक* *⛅ विशेष- रंग पंचमी के व्रत में कई तरह के खाने से बचना चाहिए, जैसे कि मांसाहारी भोजन, तली हुई चीज़ें, प्याज़-लहसुन, *🎈व्रत पर्व विवरण - 👉*⛅ विशेष- रंग पंचमी का हिंदू संस्कृति में एक विशेष स्थान है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस दिन देवता रंग और गुलाल (रंगीन पाउडर) के साथ खेलने के लिए पृथ्वी पर उतरते हैं। यह त्यौहार राजस (जुनून) और तम (अंधकार) पर जीत का प्रतीक है, जिससे दिव्य ऊर्जा और सकारात्मक ऊर्जा का आह्वान होता है। *🛟चोघडिया, दिन🛟* लाभ 06:41 - 08:11 शुभ अमृत 08:11 - 09:41 शुभ काल 09:41 - 11:12 अशुभ शुभ 11:12 - 12:42 शुभ रोग 12:42 - 14:13 अशुभ उद्वेग 14:13 - 15:43 अशुभ चर 15:43 - 17:13 शुभ लाभ 17:13 - 18:44 शुभ *🔵चोघडिया, रात🔵 उद्वेग 18:44 - 20:13 अशुभ शुभ 20:13 - 21:43 शुभ अमृत 21:43 - 23:12 शुभ चर 23:12 - 24:42* शुभ रोग 24:42* - 26:11* अशुभ काल 26:11* - 27:41* अशुभ लाभ 27:41* - 29:10* शुभ उद्वेग 29:10* - 30:39* अशुभ
♥️🙏द्वापर युग में कृष्ण ने खेली थी राधा संग होली देवताओं की होली है इसलिए मानते हैं रंग पंचमी,
♥️🙏 होली के पांचवें दिन यानी चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को रंग पंचमी मनाई जाती है। इसकी शुरुआत होली के अगले दिन से हो जाती है, जो पंचमी तक चलती है। ♥️🙏 होलिका दहन के दिन जहां होलिका, प्रह्लाद और नृसिंह भगवान की पूजा की जाती है, वहीं धुलेंडी के दिन विष्णु और लक्ष्मी की पूजा का प्रचलन है। रंग पंचमी के दिन राधा-कृष्ण की पूजा की जाती है। खासतौर पर बरसाने में इस दिन उनके मंदिर में विशेष पूजा होती है।
♥️🙏ब्रज क्षेत्र में रंग पंचमी के दिन को पांच दिन तक चलने वाले होली पर्व के समापन का दिन भी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि रंग पंचमी के दिन देवी-देवता अपने भक्तों साथ होली खेलने के लिए पृथ्वी पर आते हैं। इसलिए रंग पंचमी पर्व को देव पंचमी भी कहा जाता है। इस बार रंग पंचमी 19 मार्च को है।
♥️🙏पौराणिक कथाओं के अनुसार रंग पंचमी की परंपरा द्वापर युग में कृष्ण ने शुरू की थी। कृष्ण ने राधा के साथ चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को होली खेली थी। यह देखकर गोपियां भी राधा-कृष्ण के साथ होली खेलने लगीं।
♥️🙏देवी-देवताओं ने जब पृथ्वी पर आनंद की ऐसी अनोखी छटा देखी, तो उनके अंदर भी राधा-कृष्ण के साथ होली खेलने की इच्छा हुई। अपनी इस इच्छा को पूरी करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने गोपियों और ग्वालों का रूप धारण लिया और उनके साथ होली खेलने ब्रज में आ गए।
♥️🙏इसलिए रंग पंचमी को देवताओं की होली माना जाता है। द्वापर युग में शुरू हुई यह परंपरा आज भी चल रही है। ऐसी मान्यता है कि रंग पंचमी के दिन राधा-कृष्ण अपना वेश बदलकर भक्तों के साथ होली खेलने पृथ्वी पर आते हैं।
♥️🙏एक मान्यता यह भी है कि कृष्ण ने गोपियों के साथ रासलीला रचाई थी और दूसरे दिन रंग खेल कर उत्सव मनाया था। एक अन्य कथानुसार फाल्गुन पूर्णिमा के दिन पूतना का वध हुआ था। इस खुशी में नंदगांववासियों ने पांच दिन तक रंग खेल कर उत्सव मनाया था। अन्य पौराणिक कहानी के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका के मरने और प्रह्लाद के बचने की खुशी में लोगों ने पांच दिन तक रंग खेल कर उत्सव मनाया।
♥️🙏भगवान शिव ने फाल्गुन पूर्णिमा के दिन ही रति को कामदेव के जीवित करने का आश्वासन दिया था। इसके बाद चारों ओर खुशियां छा गई और देवताओं ने रंग पंचमी के दिन हर्षोल्लास के साथ रंगोत्सव मनाया इसलिए इसे देव होली भी कहा जाता है।
♥️🙏 श्रीकृष्ण जी और तांत्रिक साधना :-🙏 🕉श्रीकृष्ण को सामान्यतः भक्ति, योग और वेदांत 🕉श्रीकृष्ण जी और तांत्रिक साधना :-
श्रीकृष्ण को सामान्यतः भक्ति, योग और वेदांत के संदर्भ में अधिक देखा जाता है। लेकिन, उनकी तांत्रिक साधना के, कुछ गूढ़ पहलू भी हैं, जिनका संकेत शास्त्रों में मिलता है।
1. श्रीकृष्ण और तंत्र की अवधारणा -
तंत्र का मूल उद्देश्य, ऊर्जा (शक्ति) का जागरण और उसका सही दिशा में उपयोग करना है। श्रीकृष्ण के जीवन और शिक्षाओं में, कई ऐसे तत्व मिलते हैं, जो तांत्रिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं -
(1) कुंडलिनी जागरण –
भगवान श्रीकृष्ण को योगेश्वर कहा जाता है, और योग के उच्चतम स्तर पर तंत्र और कुंडलिनी का ज्ञान आता है। भगवद गीता में, उन्होंने ‘सर्वयोगेश्वर’ रूप में आत्मसाक्षात्कार का मार्ग बताया है।
(2) रासलीला का गूढ़ रहस्य –
श्रीकृष्ण की रासलीला, केवल लौकिक प्रेम कथा नहीं है। बल्कि, यह शक्ति और शिव के मिलन का प्रतीक है, जो तांत्रिक साधना की एक महत्वपूर्ण धारा है। यह सहस्रार चक्र में स्थित, दिव्य ऊर्जा के जागरण को दर्शाता है।
(3) सुदर्शन चक्र –
श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र, महाकाली तंत्र से संबंधित माना जाता है, जो उच्च स्तर की ऊर्जा का प्रतीक है। यह ‘ श्रीविद्या ’ और ‘ कृष्ण विद्या ’ तंत्र से भी जुड़ा है।
2. श्रीकृष्ण और श्रीविद्या तंत्र -
(1) श्रीकृष्ण के रूप को तांत्रिक परंपरा में, श्रीविद्या साधना से जोड़ा जाता है।
(2) ‘गोविंद’ और ‘गोपाल’ नाम शक्ति के साथ, उनके अद्वितीय संबंध को दर्शाते हैं।
(3) कुछ ग्रंथों में ‘ कृष्ण-कालिका ’ साधना का उल्लेख मिलता है, जो तांत्रिक शक्तियों के उच्चतम स्वरूप की उपासना है।
3. गीता में तांत्रिक संकेत -
(1) " योगेश्वरः कृष्णः " – श्रीकृष्ण को योग और तंत्र के सर्वोच्च ज्ञाता के रूप में दर्शाया गया है।
(2) " मंत्रविद्या " – श्रीकृष्ण ने अर्जुन को दिव्य ज्ञान और उच्चतम मंत्रों का उपदेश दिया, जो तंत्र का मूल है।
(3) " अहं सर्वस्य प्रभवः " (गीता 10.8) – यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा के स्रोत के रूप में, श्रीकृष्ण की स्थिति को दर्शाता है।
4. कृष्ण तांत्रिक साधना के स्रोत ------ कृष्ण यजुर्वेद तंत्र, कृष्ण-कालिका तंत्र, श्रीविद्या तंत्र, गोपनीय तंत्र ग्रंथ।
यद्यपि श्रीकृष्ण की साधना मुख्य रूप से भक्तियोग, ज्ञानयोग और कर्मयोग पर आधारित मानी जाती है। लेकिन, उनके जीवन और शिक्षाओं में तांत्रिक साधना के कई गूढ़ रहस्य भी छिपे हैं। श्रीकृष्ण का तांत्रिक स्वरूप शक्ति-साधना, कुंडलिनी जागरण, और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के संतुलन से जुड़ा हुआ है।
*☠️🐍जय श्री महाकाल सरकार ☠️🐍*🪷* ▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ *♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।* *अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।* *हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।* *राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...* *👉कामना-भेद-बन्दी-मोक्ष* *👉वाद-विवाद(मुकदमे में) जय* *👉दबेयानष्ट-धनकी पुनः प्राप्ति*। *👉*वाणीस्तम्भन-मुख-मुद्रण* *👉*राजवशीकरण* *👉*शत्रुपराजय* *👉*नपुंसकतानाश/ पुनःपुरुषत्व-प्राप्ति* *👉 *भूतप्रेतबाधा नाश* *👉 *सर्वसिद्धि* *👉 *सम्पूर्ण साफल्य हेतु, विशेष अनुष्ठान हेतु। संपर्क करें।* *♥️रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* *।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 🕉️📿🔥🌞🚩🔱🚩🔥🌞
*🎈नक्षत्र - स्वाति 17:50:49 तत्पश्चात विशाखा* *🎈योग - व्याघात 16:42:33 तक, तत्पश्चात हर्शण* *🎈करण- बव 08:51:02 तत्पश्चात कौलव * *🎈राहु काल_हर जगह का अलग है- सुबह 03:43 से दोपहर 05:13 तक* *🎈सूर्योदय - 06:41:36* *🎈सूर्यास्त - 06:43:14* *🎈चन्द्र राशि- तुला* *🎈सूर्य राशि - मीन* *⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में* *⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:06 से प्रातः 05:53 तक,* *⛅अभिजीत मुहूर्त - 12:19 पी एम से 01:07 पी एम तक* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:19 ए एम, मार्च 19 से 01:06 ए एम, मार्च 19 तक* *⛅ विशेष- चतुर्थी के व्रत में कई तरह के खाने से बचना चाहिए, जैसे कि मांसाहारी भोजन, तली हुई चीज़ें, प्याज़-लहसुन, *🎈व्रत पर्व विवरण - 👉*⛅ विशेष- चैत्र संकष्टी चतुर्थी 2025 की तारीख और शुभ मुहूर्त। इस बार चैत्र माह की संकष्टी चतुर्थी 17 मार्च 2025 दिन सोमवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 17 मार्च को शाम 7:33 बजे शुरू होगी और 18 मार्च को रात 10:08 बजे समाप्त होगी। इस दिन रात 9:22 बजे चंद्रमा उदय होगा, जिसके बाद व्रत का पारण किया जाएगा। इस दिन सोमवार भी पड़ रहा है, जो भगवान शिव का दिन होता है। ऐसे में गणेश जी के साथ शिव और माता पार्वती की पूजा करने से विशेष फल मिलता है। *🛟चोघडिया, दिन🛟* रोग 06:42 - 08:12 अशुभ उद्वेग 08:12 - 09:42 अशुभ चर 09:42 - 11:12 शुभ लाभ 11:12 - 12:42 शुभ अमृत 12:42 - 14:13 शुभ काल 14:13 - 15:43 अशुभ शुभ 15:43 - 17:13 शुभ रोग 17:13 - 18:43 अशुभ *🔵चोघडिया, रात🔵 काल 18:43 - 20:13 अशुभ लाभ 20:13 - 21:43 शुभ उद्वेग 21:43 - 23:12 अशुभ शुभ 23:12 - 24:42* शुभ अमृत 24:42* - 26:12* शुभ चर 26:12* - 27:41* शुभ रोग 27:41* - 29:11* अशुभ काल 29:11* - 30:41* अशुभ
♥️♥️ ♥️🙏 जय श्री महाकाल जी🙏 शिव की वेशभूषा का रहस्य महादेव शिवशम्भू हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण देवताओं में से एक है एव त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव भी कहते हैं। इनको भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र (वेद में), नीलकंठ के नाम से भी हम जानते है। तंत्र साधना इनकी भैरव के नाम से भी पहचान है। इनका नाम रुद्र है। यह व्यक्ति की चेतना के अन्तर्यामी हैं। इनकी अर्धाङ्गिनी (शक्ति) का नाम माता पार्वती है।
देवताओ में महादेव शिवशम्भू के वेशभूषा सबसे आश्चर्यजनक और रहस्मयी है। आध्यात्मिक रूप से देवाधिदेब के वेशभूषा और रूप में अत्यन्त चौकानेवाले गहरे अर्थ छिपे हुए है। महादेव की जटाएं हैं और उन जटाओं में एक चन्द्र चिह्न होता है। उनके ललाट पर तीसरा नेत्र है। वे गले में सर्प धारण और रुद्राक्ष की माला लपेटे रहते हैं। उनके एक हाथ में डमरू, तो दूसरे में त्रिशूल है। भोलेनाथ संपूर्ण देह पर भस्म लगाए रहते हैं। उनके शरीर के निचले हिस्से को वे बाघछाल से लपेटे रहते हैं। वे वृषभ (बैल) की सवारी करते हैं और कैलाश पर्वत पर ध्यान लगाए बैठे रहते हैं। पुराणों के अनुसार महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भगवान शिव के वेशभूषा से जुड़े इन प्रतिको के रहस्यों को जान लेने पर मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।भगवान शिव की वेश-भूसा ऐसी है की हर धर्म का व्यक्ति उसमे अपना प्रतीक ढूढ़ सकता है। आइये जानते है भगवान शिव और उनकी वेशभूषा से जुड़े रहस्य।
1. मस्तक पर चन्द्र का विराजमान होना : मस्तक पर चन्द्र का विराजमान होनाज्योतिष शास्त्र के अनुसार चन्द्रमा को मन का प्रतीक माना गया है। चूकी मन की प्रवृति बहुत चंचल होती है जो मनुष्य के पतन का कारण बनता है. इसी कारण से महादेव शिवशम्भू ने चन्द्रमा रूपी मन को काबू कर अपने मस्तक में धारण किया है। मूलत: शिव के सभी त्योहार और पर्व चान्द्रमास पर ही आधारित होते हैं। पुराणों के अनुसार प्रजापति दक्ष द्वारा मिले श्राप से बचने के लिए चन्द्रमा ने भगवान शिव की घोर तपस्या की। चन्द्रमा की तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने उनके जीवन की रक्षा की और उन्हें अपने शीश पर धारण किया।
2. अस्त्र के रूप में त्रिशूल : अस्त्र के रूप में त्रिशूलपौराणिक कथाओं में महादेव प्रमुखतः दो शस्त्र, धनुष और त्रिशूल धारण करते थे। मान्यता है कि धनुष का अविष्कार उन्होंने खुद किया था लेकिन मान्यतानुसार सृष्टि के प्रारम्भ में ब्रम्ह्नाद से जब भगवान शंकर प्रकट हुए तब उनके साथ ही सत, रज और तम यानि प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन यह तीनो गुण भी हुय्रे और येही तीनो गुण महादेह के तीन शूल यानो त्रिशूल बने । त्रिशूल बहुत ही अचूक और घातक अस्त्र था। इसकी शक्ति के आगे कोई भी शक्ति सामना नहीं कर सकती ।
त्रिशूल 3 प्रकार के कष्टों दैनिक, दैविक, भौतिक के विनाश का सूचक भी है और सृष्टि के क्रमशः उदय, संरक्षण और लयीभूत होने का प्रतिनिधित्व करते भी हैं। माना जाता है कि यह महाकालेश्वर के 3 कालों (वर्तमान, भूत, भविष्य) का प्रतीक भी है। सत, रज और तम तीनो शूल के बीच सामंजस्य बनाये बगैर सृष्टि का संचालन करना कठीन व नामुमकिन था इसीलिये भोलेनाथ ने त्रिशूल शस्त्र को अपने हाथो में धारण किया ।
3. शिव का सेवक वासुकि विषधर नाग: शिव का सेवक वासुकि विषधर नागपुराणों में उल्लेख है कि भगवान शिव के गले में जो नाग हर समय आभूषण की तरह लिपटे रहते हैं उनका नाम वासुकी है जो शेषनाग (अनंत) के बाद नाग लोक के राजा हुए। वासुकी की मदद से ही उनको रस्सी बना कर समुद्रमंथन संभव हुआ था। वासुकी भगवान शिव के परमभक्त थे और इनकी भक्ति से प्रसन्न होकर ही भोले शंकर ने इन्हें अपने गले में आभुषण बतौरधारण करने का वरदान दिया था। भगवान शिव के नागेश्वर ज्योतिर्लिंग नाम से स्पष्ट है कि नागों के ईश्वर होने के कारण शिव का नाग या सर्प से अटूट संबंध है। गले के हार के रूप में लिपटा हुआ वासुकी नाग जकड़ी हुई कुंडलिनी शक्ति का प्रतीक है।
4. डमरू: डमरूडमरू, जो नाद का प्रतीक है। नाद अर्थात ऐसी ध्वनि, जो ब्रह्मांड में निरंतर जारी है जिसे ‘ॐ’ कहा जाता है।
मान्यता है भगवान शिव संगीत के जनक के रूप में भी जाने जाते है। शिवजी के हाथो में डमरू होने पर भी विचित्र रोचक कहानी है। मान्यता है कि सृष्टि के प्रारम्भ में सुरों व विद्याकी देवी देवी सरस्वती ने अपने प्राकट्य होने के बाद अपनी वीणा के स्वर झंकार से सृष्टि में ध्वनि को जन्म दिया मगर यह ध्वनि बिलकुल सुर व संगीत विहीन थी। भगवान शिव ने ही उस समय नृत्य करते हुए चौदह बार डमरू बजाया और इस ध्वनि से व्याकरण और संगीत के धन्द, ताल का जन्म हुआ। इस प्रकार शिव के डमरू की उत्पत्ति हुई। मान्यता है कि डमरू ब्रम्ह का स्वरुप है जो दूरी से तो विस्तृत नज़र आता है मगर जैसे जैसे ब्रह्म के करीब पहुंचता है बिलकुल संकुचित हो जाता है और दूसरे सिरे से मिल जाता है और विशालता की ओरबढता है। सृष्टि में संतुलन बनायेरखने के लिये भोले शिव डमरू को भी अपने साथ लेकर प्रकट हुए थे । पुराणों के अनुसार शिव के डमरू से कुछ चमत्कारी मन्त्र निकले थे. जिनका जाप करने से लोगों के जीवन से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं तथा उनका जीवन सुखमयी बन जाता हैं.
5. शिव का वाहन वृषभ (बैल नदी): शिव का वाहन वृषभ बैल नदीवृषभ, भगवान शिव का वाहन है. वैदिक साहित्य में शिव शब्द ‘जनता के कल्याण’ (लोक कल्याण) का पर्याय है. और बैल लोक कल्याण कर्ता का वाहक है. हमेशा शिव के साथ रहते हैं। वृषभ का अर्थ धर्म है। मनुस्मृति के अनुसार ‘वृषो हि भगवान धर्म:’। वेद ने धर्म को 4 पैरों वाला प्राणी कहा है। उसके 4 पैर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष हैं। महादेव इस 4 पैर वाले वृषभ की सवारी करते हैं यानी धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष उनके अधीन हैं।
मान्यता है के वृषभ को नंदी भी कहा जाता है, जो भगवान शिव के एक गण हैं। नंदी ने ही धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र, कामशास्त्र और मोक्षशास्त्र की रचना की थी। वृषभ, जो अपने जीवन प्रर्यंत मानव जाति का कार्य करता है, यही कारण है कि प्रत्येक शिव मंदिर में एक नंदी की प्रतिमा (मूर्ति) भगवान शिव की प्रतिमा (मूर्ति) के साथ होती है।
6. शिवजी की जटाएं: शिवजी की जटाएंशिव की जटाएं अंतरिक्ष का प्रतीक हैं। अत: आकाश उनकी जटा का स्वरूप है, वायुमंडल का प्रतीक है। घने बादलों से काली और उलझी जटाओं में चंद्रमा विराजमान है। इन्हीं से गंगा का अवतरण भी हुआ है। तो यह अनंत अंतरिक्ष का प्रतीक हैं। भोले बाबा को जटाधारी भी कहा जाता है। भगवान शिव की जटाओं में चंद्रमा से लेकर माँ गंगा तक समायी हुई, प्रवाहित होती हैं। शिव जी की जटाएं बहुत ही विश्मय्कारी है। यह बहुत अचंभित कर देने वाला है।
7. शिव की जटा में गंगा: शिव की जटा में गंगाजब स्वर्ग से गंगा को धरती पर उतारने का उपक्रम हुआ तो यह भी सवाल उठा कि गंगा के इस अपार वेग से धरती में विशालकाय छिद्र हो सकता है, तब गंगा पाताल में समा जाएगी। संसार के दुखों को हरने वाले शिव शम्भू प्रसन्न हुए और भगवान शिव ने भगवान विष्णु के चरण से निकलने वाली गंगा को अपने सिर पर धारण करके पृथ्वी पर उतारने का राजा भागीरथ को वरदान दिया। ऐसे में इस समाधान के लिए भगवान शिव ने गंगा को सर्वप्रथम अपनी जटा में विराजमान किया और फिर उसे धरती पर उतारा। गंगोत्री तीर्थ इसी घटना का गवाह है। गंगा को शास्त्रों में देव नदी एवं स्वर्ग की नदी कहा गया है। इस नदी को पृथ्वी पर लाने का काम महाराज भगीरथ ने किया था।
8. भभूत या भस्म: भभूत या भस्मभस्म जगत की निस्सारता का बोध कराती है। भस्म आकर्षण, मोह आदि से मुक्ति का प्रतीक भी है और महाकाल को अतिप्रिय है। चूँकि शिव अपने शरीर पर भस्म धारण करते हैंइसलिये शिवलिंग का अभिषेक भी भस्म से होता है हैं, जिसमें श्मशान की भस्म का इस्तेमाल किया जाता है। भस्म का लेप दर्शाता है कि यह संसार नश्वर है शरीर नश्वरता का प्रतीक है।
9. तीन नेत्र: भगवान शिव को त्रिलोचन भी कहा जाता है। भोले बाबा का तीसरा नेत्र हमेशा जाग्रत रहता है, लेकिन बंद। शिव का यह नेत्र आधा खुला और आधा बंद है। यह इसी बात का प्रतीक है कि व्यक्ति ध्यान-साधना या संन्यास में रहकर भी संसार की जिम्मेदारियों को निभा सकता है। भोले बाबा के ये तीन नेत्र सत्व, रज, तम तीन गुणों, भूत, वर्तमान, भविष्य, तीन कालों, और स्वर्ग, मृत्यु पाताल तीन लोकों के प्रतीक हैं।
10. हस्ति चर्म और व्याघ्र चर्म: हस्ति चर्म और व्याघ्र चर्मभगवान शिव के शरीर पर हस्ति चर्म और व्याघ्र चर्म है, अर्थात हाथी और व्याघ्र अर्थात शेर। हस्ती अभिमान का और व्याघ्र हिंसा व अहंकार का प्रतीक माना जाता है। इसका अर्थ है कि शिव ने हिंसा व अहंकार का दमन कर उसे अपने नीचे दबा लिया हैयानी अहंकार और हिंसा दोनों को दबा रखा है। शिव जी की हस्ति चर्म और व्याघ्र चर्म बहुत ही विश्मय्कारी है। यह बहुत अचंभित कर देने वाला है।
11. शिव का धनुष पिनाक: शिव का धनुष पिनाकशंकर जी का प्रिय धनुष था। भगवान शंकर ने जिस धनुष को स्वयं अपने हाथों से बनाया था उसकी टंकार से ही बादल फट जाते थे और पर्वत हिलने लगते थे। ऐसा लगता था मानो भूचाल आ गया हो। यह धनुष बहुत ही शक्तिशाली था। इसी के एक तीर से त्रिपुरासुर की तीनों नगरियों को ध्वस्त कर दिया गया था। इस धनुष का नाम पिनाक था। पिनाक शिवधनुष राजा जनक के पास धरोहर के रूप में सरक्षित रखा गया था। उनके इस विशालकाय धनुष को कोई भी उठाने की क्षमता नहीं रखता था। लेकिन भगवान राम ने इसे उठाकर इसकी प्रत्यंचा चढ़ाई और इसे एक झटके में तोड़ दिया।
12. शिव का चक्र: शिव का चक्रशंकरजी के पास भवरेंदु नाम का चके था जो छोटा, मगर सबसे अचूक अस्त्र माना जाता था।प्राचीन और प्रामाणिक शास्त्रों के अनुसार सुदर्शन चक्र का निर्माण भगवान शंकर ने किया था और निर्माण के बाद, विष्णु जिन्होंने एक फूल की पूर्ति के लिए अपना एक नेत्र निकालकर शिव को अर्पित कर दिया, श्री हरी विष्णु की भक्ति देखकर भगवान शंकर बहुत प्रसन्न हुए और श्रीहरि के समक्ष प्रकट होकर ने विष्णुजी को सुदर्शन चक्र प्रदान किया। जरूरत पड़ने पर श्रीविष्णु ने इसे देवी पार्वती को प्रदान कर दिया। पार्वती ने इसे परशुराम को दे दिया और भगवान कृष्ण को यह सुदर्शन चक्र परशुराम से मिला।
13. त्रिपुंड तिलक: त्रिपुंड तिलकभगवान शंकर अपने ललाट अर्थात भृकुटी के अंत में मस्तक पर त्रिपुंड तिलक लगाते हैं भस्म या चंदन से तीन रेखाएं बनाई जाती हैं । शैव संप्रदाय के लोग इसे धारण करते हैं। शिवमहापुराण के अनुसार त्रिपुंड की तीन रेखाओं में से हर एक में नौ-नौ देवता निवास करते हैं। इसे लगाने से आ सिर्फ आत्मा को परम शांति मिलती है बल्कि सेहत की दृष्टि से भी चमत्कारिक लाभ देती है।
त्रिपुंड दो प्रकार का होता है- पहला तीन धारियों के बीच में लाल रंग का एक बिंदु होता है। यह बिंदु शक्ति का प्रतीक होता है। आम इंसान को इस तरह का त्रिपुंड नहीं लगाना चाहिए। दूसरा होता है सिर्फ तीन धारियों वाला तिलक या त्रिपुंड। इससे मन एकाग्रचित होता है। त्रिपुंड त्रिलोक्य और त्रिगुण का प्रतीक है जो सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण का प्रतीक भी और ययहचंदन का या भस्म का होता है। चूँकि त्रिपुण्ड चंदन या भस्म का ही लगाया जाता है, दोनों ही मस्तक को शीतलता प्रदान करते हैं।
14. गले में मुंडमाला: गले में मुंडमालाभगवान शिव इस जगत के संहारक है इसलिये उनको महाकाल भी कहा गया है भगवान शंकर के गले में जो १०८ मुंडो की मुंडमाला है, इस बात का प्रतीक है कि भगवान शिव ने मृत्यु को वश में कर रखा है।
15. रुद्राक्ष: रुद्राक्षमान्यता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई थी। रूद्राक्ष को शिव की आंख कहा जाता है। रुद्राक्ष दो शब्दों के मेल से बना है पहला रूद्र का अर्थ होता है भगवान शिव और दूसरा अक्ष इसका अर्थ होता है आंसू। *☠️🐍जय श्री महाकाल सरकार ☠️🐍*🪷* ▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ *♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।* *अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।* *हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।* *राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...* *👉कामना-भेद-बन्दी-मोक्ष* *👉वाद-विवाद(मुकदमे में) जय* *👉दबेयानष्ट-धनकी पुनः प्राप्ति*। *👉*वाणीस्तम्भन-मुख-मुद्रण* *👉*राजवशीकरण* *👉*शत्रुपराजय* *👉*नपुंसकतानाश/ पुनःपुरुषत्व-प्राप्ति* *👉 *भूतप्रेतबाधा नाश* *👉 *सर्वसिद्धि* *👉 *सम्पूर्ण साफल्य हेतु, विशेष अनुष्ठान हेतु। संपर्क करें।* *♥️रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* *।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 🕉️📿🔥🌞🚩🔱🚩🔥🌞
*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक - 17 मार्च 2025* *🎈दिन - सोमवार* *🎈विक्रम संवत् - 2081* *🎈अयन - उत्तरायण* *🎈ऋतु - बसन्त* *🎉मास - चैत्र* *🎈पक्ष- कृष्ण* *🎈तिथि - तृतीया 19:32:32 चतुर्थी* *🎈नक्षत्र - चित्रा 14:46:08 तत्पश्चात स्वाति* *🎈योग - ध्रुव 15:43:57 तक, तत्पश्चात व्याघात* *🎈करण- विष्टि भद्र 19:32:32 तत्पश्चात बव * *🎈राहु काल_हर जगह का अलग है- सुबह 08:13 से सुबह 09:43 तक* *🎈सूर्योदय - 06:42:41* *🎈सूर्यास्त - 06:42:43* *🎈चन्द्र राशि- तुला* *🎈सूर्य राशि - मीन* *⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में* *⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:07 से प्रातः 05:54 तक,* *⛅अभिजीत मुहूर्त - 12:19 पी एम से 01:08 पी एम तक* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:19 ए एम, मार्च 18 से 01:07 ए एम, मार्च 18 तक* *⛅ विशेष- तृतीया तिथि को, सात्विक भोजन करना चाहिए और तामसिक भोजन से बचना चाहिए. इस दिन आप फल, सत्तू, लौकी का हलवा, श्रीखंड, और दूध से बनी मिठाइयाँ खा सकते हैं।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* *🎈व्रत पर्व विवरण - 👉*⛅ विशेष- तृतीया को परमल खाना निषेध है, क्योंकि यह शत्रुओं की वृद्धि करता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* *🛟चोघडिया, दिन🛟* अमृत 06:43 - 08:13 शुभ काल 08:13 - 09:43 अशुभ शुभ 09:43 - 11:13 शुभ रोग 11:13 - 12:43 अशुभ उद्वेग 12:43 - 14:13 अशुभ चर 14:13 - 15:43 शुभ लाभ 15:43 - 17:13 शुभ अमृत 17:13 - 18:43 शुभ *🔵चोघडिया, रात🔵 चर 18:43 - 20:13 शुभ रोग 20:13 - 21:42 अशुभ काल 21:42 - 23:12 अशुभ लाभ 23:12 - 24:42* शुभ उद्वेग 24:42* - 26:12* अशुभ शुभ 26:12* - 27:42* शुभ अमृत 27:42* - 29:12* शुभ चर 29:12* - 30:42* शुभ
♥️♥️ ♥️#🙏🙏🙏 जय श्री महाकाल जी🙏🙏🙏🙏 ♥️♥️आज का राशिफल♥️♥️♥️♥️ 🌞🌞🌞🌞17/3/2025 सोमवार 🌞🌞🌞🌞 ✋मस्त रहिए स्वस्थ रहिए✋
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ) आज के दिन को शांति से बिताने की आवश्यकता है आज आप स्थित को भांप कर ही व्यवहार करेंगे परन्तु सामने वाला आपकी परिस्थिति का खयाल नही करेगा धन सम्बन्धित मामले किसी ना किसी रूप में कलह का कारण बनेंगे इन्हें प्रेम से निपटाने का प्रयास करें। कार्य व्यवसाय से धन की आमद तो होगी लेकिन कोई न कोई खर्च लगा रहने से संध्या बाद हाथ खाली ही रह जायेगा। पति पत्नी की घरेलू कलह बाहर के लोगो तक न पहुचे इसका विशेष ध्यान रहे लोग सुलझाने की जगह आनंद लेंगे। संतानो का व्यवहार भी अनापेक्षित रहने से अंदर ही अंदर परेशान रहेंगे कहल बढ़ने के डर से विरोध भी नही कर पाएंगे। सेहत ठीक ही रहेगी। मध्य रात्रि बाद स्थिति में सुधार आने लगेगा।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो) आज के दिन आप पिछली गलतियों से सीख लेकर ही सभी क्षेत्र पर व्यवहार करेंगे इससे मान सम्मान में वृद्धि के साथ ही नुकसान में भी कमी आएगी। कार्य व्यवसाय अथवा सामाजिक क्षेत्र पर विरोधियो के प्रति नरम व्यवहार रखना आज कुछ ना कुछ लाभ ही देकर जाएगा। आज की मेहनत निकट भविष्य में धन लाभ के नए मार्ग खोलेगी इसमे कमी ना रखे। आज भी धन लाभ आशानुकूल रहेगा फिर भी धन संबंधित प्रसंग आने पर दिमाग गर्म होगा इससे बचे। महिला वर्ग कार्य समय पर करेंगी लेकिन अहसान भी जताएंगी। भाई बंधुओ को आपके अथवा आपको उनसे उनके सहयोग की आवश्यकता पड़ेगी व्यवहारिक रहे ईर्ष्या बनते कामो की बिगाड़ेगी। सेहत लगभग सामान्य ही रहेगी।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा) आज भी आपका हठीला स्वभाव बनते कार्यो में विलंब करेगा लोग आपसे व्यवहार तो करेंगे लेकिन केवल स्वार्थ पूर्ति के लिए ही अंदर से आदर का भाव नही रहेगा। कार्य क्षेत्र पर सहयोग की कमी रहेगी जिससे अधिकांश कार्य अपने ही बल करने पढ सकते है। नौकरी पेशा लोग भी अधिकारियों से नाराजगी के चलते कार्यो को मनमाने ढंग से जल्दबाजी में करेंगे। धन की आमद आज जिस समय उम्मीद नही होगी तब अकस्मात ही होगी। आज विवेकी सोच रखें अन्यथा आने वाले दिनों में इसका अशुभ परिणाम अवश्य भोगना पड़ेगा। घर के सदस्य विशेष कर स्त्री अथवा संताने अपनी मांगे मनवाने के लिये अशांति फैलाएंगी इन्हें समय पर पूरा करे वरना आने वाले कल शांति से बैठना मुश्किल होगा। संध्या बाद किसी अरिष्ट की आशंका से मन भयभीत रहेगा।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो) आज का दिन पहले की तुलना में सुधार वाला रहेगा लेकिन आज धन की प्राप्ति केवल जोखिम लेकर ही हो सकेगी। कार्य क्षेत्र पर हानि के भय से जल्दी से कोई बड़ा निर्णय नही लेंगे भयभीत ना हो निसंकोच होकर किसी भी प्रकार का जोखिम विशेष कर निवेश करें वरना निकट भविष्य में आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। व्यवसाय में आज किया निवेश तुरंत लाभ तो नही देगा लेकिन आने वाले दिनों में इसका सकारत्मक परिणाम अवश्य मिल सकेगा। धर्म कर्म टोन टोटको में भी रुचि रहेगी इनपर समय और अल्प धन भी व्यय होगा। भाई बंधु और स्त्री वर्ग का मिजाज चढ़ा रहेगा सतर्क रहकर व्यवहार करें। सेहत में कुछ ना कुछ नुक्स लगा रहेगा।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे) आज के दिन आप सुनेंगे सबकी लेकिन करेंगे अपने ही मन की फिर भी आज व्यवसाय से आकस्मिक लाभ होने पर स्थिति बिगड़ने नही पाएगी दिन के आरंभ में जो लोग आपके निर्णयों का विरोध कर रहे थे दोपहर बाद वे ही समर्थन करते दिखेंगे। घर मे भाई बंधुओ से किसी पुश्तैनी अथवा व्यावसायिक बात को लेकर कहा सुनी हो सकती है। भागीदारी के कार्यो में निवेश से बचे अन्यथा हानि ही होगी इसके विपरीत एकल कार्यो में लाभ आवश्यकता से अधिक ही होगा। परिवार का वातावरण पल पल में बदलने पर असमंजस में रहेंगे संताने जिद पर अडेंगी मांगे मनवाकर ही शांत होंगी। मुह पर मीठा बोलने वालों से सतर्क रहें खास कर धनु एवं कुम्भ राशि जातको पर जल्दी से विश्वास ना करें। मानसिक संतुष्टि नही रहेगी।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो) आज के दिन आपका मन काल्पनिक दुनिया की सैर करेगा मन मे खयाली पुलाव पकाएंगे लेकिन कर्म करने में लचीले रहेंगे। आज आप जिस भी कार्य को करेंगे उसकी सफ़लता असफ़लता किसी अन्य के हाथ मे रहेगी विशेष कर पति अथवा पत्नी से बनाकर चले अन्यथा अंत समय मे सारी योजना रखी रह जायेगी। मध्यान के आस पास अकस्मात ही कही से धन की प्राप्ती होगी इसी से दैनिक खर्च के साथ भविष्य के खर्च चलाने पड़ेंगे इसलिए फिजूल खर्ची पर नियंत्रण लाये। आज व्यसन अथवा दुराचरण से बच कर रहे पारिवारिक मान हानि के साथ शारीरिक रूप से भी नुकसान देह रहेगा। कमर से नीचे के भाग में कोई नया रोग उभरने की संभावना है।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते) आज के दिन परिस्थितियां उलझन में डालने वाली बन रही है। आज कोई भी कार्य करने से पहले उसकी रूप रेखा अवश्य बना कर चले साथ ही हानि लाभ की समीक्षा भी पहले ही कर ले अन्यथा समय और धन की बर्बादी हो सकती है। दिनचर्या दिशाहीन रहने के कारण जिस भी कार्य को करेंगे उसे बीच मे ही अन्य काम पड़ने पर छोड़ना पड़ेगा। व्यवसाय में भी लाभ के पास पहुचते पहुचते भ्रमित हो जाएंगे। संध्या के आस पास ही थोड़ा बहुत धन लाभ हो सकेगा। नौकरी वाले जातक आज जल्दी से काम करने के मूड में नही रहेंगे। घरलू खर्चो में संकीर्णता दिखाना कलह का कारण बनेगा। महिलाए ईर्ष्या भाव से ग्रसित रहेंगी किस्मत को दोष देंगी। अकस्मात यात्रा के योग बन रहे है।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू) आज का दिन बीते कल की तुलना में बेहतर रहेगा। समाज से सम्मान तो मिलेगा इसके लिए कार्यों से समय भी निकालना पड़ेगा। कार्य व्यवसाय में भी प्रगति होगी लेकिन धन लाभ के समय आश्वाशन ही मिलने से निराश रहेंगे। पूजा पाठ के लिए समय कम ही मिलेगा फिर भी परोपकार के अवसर खाली नही जाने देंगे जरूरतमंदो को आप जितना हो सके उतना सहयोग करेंगे। व्यवसायी वर्ग कार्य स्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करें निकट भविष्य में आगजनी अथवा अन्य किसी प्रकार से सामान अथवा आर्थिक क्षति होने की संभावना है। विरोधी पक्ष प्रबल रहेगा लेकिन परोपकार का पुण्य हानि नही होने देगा। संतानों अथवा घर के किसी सदस्य की गलत आदत से मन आहत होगा। घुटनो अथवा अन्य शारीरिक अंगों में निर्बलता रहेगी।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे) आज के दिन परिस्थितियां पहले से बेहतर बनेगी। आज आप किसी भी हालत में समझौता करने के पक्ष ने नही रहेंगे चाहे नुकसान ही क्यो ना हो। दिनचर्या कुछ मामलों को छोड़ सुव्यवस्थित रहेगी। काम धंधा भी मध्यान बाद अकस्मात गति पकड़ेगा लेकिन स्वभाव में नरमी रखे किसी व्यावसायिक अथवा अन्य प्रतिस्पर्धी से गरमा गरमी होने का असर व्यापारिक प्रतिष्ठा पर होगा। धन की आमद आज सहज रूप से ही हो जाएगी फिर भी असंतुष्टि में भाग दौड़ करेंगे खर्च अनियंत्रित होंगे बचत ना के बराबर ही रहेगी। कन्या राशि के लोगो से बहस से बचे। घर मे किसी न किसी से रूठना मनाना लगा रहेगा संतान का सहयोग मिलेगा। गठिया अथवा जननेन्द्रिय संबंधित समस्या उभरेगी।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी) आज का दिन पिछले दिनो की अपेक्षा बेहतर रहेगा सेहत में सुधार अनुभव करेंगे। प्रातः काल से ही व्यवसाय अथवा किसी आवश्यक घरेलू कार्य में विलंब होने की चिंता रहेगी लेकिन दोपहर बाद सही कार्य स्वतः ही व्यवस्थित होने लगेंगे। कार्य क्षेत्र पर अधिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा लेकिन आज आप दिन के आरम्भ में जो भी योजना बनाएंगे उसमे आज नही तो कल सफलता अवश्य मिलेगी इसलिये मेहनत में कमी ना रखे। धन के व्यर्थ कार्यो पर खर्च को रोकने में असमर्थ रहने के कर आर्थिक कारणों से असंतुष्ट ही रहेंगे कल से परिस्थिति हर प्रकार से पक्ष में रहेगी। सरकार संबंधित उलझनों में फंसने की भी संभावना है अनैतिक कार्यो से दूर रहे। धर्म कर्म में कम रुचि रहेगी। घर की बड़ी महिलाओ से कहा सुनी हो सकती है।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा) आज के दिन आपमे धार्मिक भावनाए जागृत होंगी पूजा पाठ के लिए समय तो निकालेंगे लेकिन मन टोन टोटको पर ज्यादा विश्वाश करेगा लेकिन इनको करना ना करना एक बराबर ही है समय और धन की बर्बादी ही होगी। कार्य व्यवसाय से बीते दिनों की तुलना में लाभ में वृद्धि होगी। व्यवसाय में विस्तार के अवसर भी मिलेंगे परन्तु गलत मार्गदर्शन के कारण कर नही पाएंगे वर्तमान परिस्थित अनुसार आज काम मे विस्तार ना कर पाना अखरेगा लेकिन बाद में संतोष भी देगा। परिवार में बड़े बुजुर्गों से भाई बंधुओ को लेकर वैचारिक मतभेद रहेंगे। आवश्यक कार्य कल के लिए ना टाले संध्या बाद से सेहत में नरमी आने के कारण अधूरे रह सकते है।
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची) आज के दिन से आप काफी आशाएं लगा कर रहेंगे परन्तु एक समय मे अधिक कार्य करने पर मतिभ्रम का शिकार बनेंगे। कार्य व्यवसाय सामान्य रहेगा लेकिन आकस्मिक कार्य आने पर उचित समय नही दे पाएंगे अधीनस्थ सहकर्मियों का ऊपर निर्भर रहना पड़ेगा। यात्रा की योजना दिन के आरंभ से ही बनेगी इस पर व्यर्थ खर्च भी करना पड़ेगा। घर मे संतान के कारण कोई नई परेशानी खड़ी होगी लेकिन उच्च पदस्थ लोगों का सहयोग मिलने से राहत मिल जाएगी सरकार संबंधित कार्य संध्या से पहले पूर्ण करने का प्रयास करे अन्यथा कुछ समय के लिये लंबित रह जायेगा। परिवार की महिलाए विशेष कर स्त्री वर्ग मानसिक तनाव से ग्रसित रहेंगी। कंधे कमर अथवा अन्य शारीरिक जोड़ो में दर्द रह सकता है। *☠️🐍जय श्री महाकाल सरकार ☠️🐍*🪷* ▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ *♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।* *अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।* *हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।* *राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...* *👉कामना-भेद-बन्दी-मोक्ष* *👉वाद-विवाद(मुकदमे में) जय* *👉दबेयानष्ट-धनकी पुनः प्राप्ति*। *👉*वाणीस्तम्भन-मुख-मुद्रण* *👉*राजवशीकरण* *👉*शत्रुपराजय* *👉*नपुंसकतानाश/ पुनःपुरुषत्व-प्राप्ति* *👉 *भूतप्रेतबाधा नाश* *👉 *सर्वसिद्धि* *👉 *सम्पूर्ण साफल्य हेतु, विशेष अनुष्ठान हेतु। संपर्क करें।* *♥️रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* *।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 🕉️📿🔥🌞🚩🔱🚩🔥🌞
पंचांग - मार्च 2025*
🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓* *🎈दिनांक - 16 मार्च 2025* *🎈दिन - रविवार* *🎈विक्रम संवत् - 2081* *🎈अयन - उत्तरायण* *🎈ऋतु - बसन्त* *🎉मास - चैत्र* *🎈पक्ष- कृष्ण* *🎈तिथि - द्वितीया 16:57:43 तृतीया * *🎈नक्षत्र - हस्त 11:44:21 तत्पश्चात चित्रा* *🎈योग - वृद्वि 14:47:28 तक, तत्पश्चात ध्रुव* *🎈करण -गर 16:57:43 तत्पश्चात विष्टि भद्र * *🎈राहु काल_हर जगह का अलग है- शाम 05:12 से शाम 06:42 तक* *🎈सूर्योदय - 06:43:46* *🎈सूर्यास्त - 06:42:13* *🎈चन्द्र राशि- कन्या till 25:14:22* *🎈चन्द्र राशि- तुला from 25:14:22* *🎈सूर्य राशि - मीन* *⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में* *⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:07 से प्रातः 05:55 तक,* *⛅अभिजीत मुहूर्त - 12:20 पी एम से 01:08 पी एम तक* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:19 ए एम, मार्च 17 से 01:07 ए एम, मार्च 17 तक* *⛅ विशेष- द्वितीय तिथि को, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बिना नमक का भोजन करना चाहिए.
धार्मिक मान्यता: कुछ धार्मिक ग्रंथों में, जैसे कि भविष्य पुराण और चरक संहिता, तिथि के अनुसार भोजन के नियम बताए गए हैं. द्वितीय तिथि: भविष्य पुराण के अनुसार, द्वितीया तिथि को बिना नमक का भोजन करना चाहिए.।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* *🎈व्रत पर्व विवरण - 👉*⛅ विशेष- द्वितीया को छोटा बैंगन व कटहल खाना निषेध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* *🛟चोघडिया, दिन🛟* उद्वेग 06:44 - 08:14 अशुभ चर 08:14 - 09:43 शुभ लाभ 09:43 - 11:13 शुभ अमृत 11:13 - 12:43 शुभ काल 12:43 - 14:13 अशुभ शुभ 14:13 - 15:43 शुभ रोग 15:43 - 17:12 अशुभ उद्वेग 17:12 - 18:42 अशुभ *🔵चोघडिया, रात🔵 शुभ 18:42 - 20:12 शुभ अमृत 20:12 - 21:42 शुभ चर 21:42 - 23:12 शुभ रोग 23:12 - 24:42* अशुभ काल 24:42* - 26:13* अशुभ लाभ 26:13* - 27:43* शुभ उद्वेग 27:43* - 29:13* अशुभ शुभ 29:13* - 30:43* शुभ
♥️♥️ ♥️#ज्योतिष और स्त्रियों के कुछ महत्त्वपूर्ण योग | कुंडली के विभिन्न योग, जैसे पति से सम्बंधित कुछ योग, सुख योग, संतति योग, बंध्यापन के योग, तलाक योग विधवा योग, आदि . स्त्री का पुरुष के जीवन में बहुत ही मुख्य स्थान है, इसी कारण ज्योतिष में स्त्री वर्ग पर भी पर्याप्त विचार किया जाता है।जहां तक पुरुष और नारी के सहज सनातन संबंधों का प्रश्न है, ज्योतिष उन्हें अभिन्न अंग मानकर विचार करता है. कुंडली का सातवा स्थान एक दुसरे का सूचक है अर्थान स्त्री और पुरुष के कुंडली में सातवाँ स्थान एक दुसरे का प्रतिनिधित्व करता है।
आइये यहाँ हम स्त्री की कुंडली में स्थित ग्रहों को थोडा समझने का प्रयास करे - . 1. लग्न और चन्द्रमा , मेष , मिथुन , सिंह तुला धनु, कुम्भ, राशियों में स्थित हो तो स्त्री में पुरुषोचित गुण जैसे बलिष्ट देह, मुछों की रेखा, क्रूरता, कठोर स्व, आदि होते हैं. चरित्र की दृष्टि से इनकी प्रशंसा नहीं की जा सकती है . क्रोध और अहंकार भी इनके प्रकृति में होता है। 2. लग्न और चन्द्रमा के सम राशियों में जैसे वृषभ , कर्क, कण, वृश्चिक, मकर, मीन में हो तो स्त्रियोंचित गुण पर्याप्त मात्रा में होते है . अच्छी देह, लज्जा, पति के प्रति निष्ठा , कुल मर्यादा के प्रति आस्था, आदि प्रकृति में रहते है। 3. स्त्री के कुंडली में सातवे स्थान में शनि हो और उस पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो उसका विवाह नहीं होता। 4. सप्तम स्थान का स्वामी शनि के साथ स्थित हो या शनि से देखा जा रहा हो तो बड़ी उम्र में विवाह होता है। . पति से सम्बंधित कुछ योग : 1. लग्न में अगर मेष , कर्क, तुला , मकर राशि हो तो पति परदेश में रहने वाला होता हो या घुमने फिरने वाला होता हो। 2. सातवे स्थान में अगर बुध और शनि स्थित हो तो पति पुरुश्त्वहीन होता हो। 3. सातवे स्थान खाली हो और उस पर किसी गृह की दृष्टि भी न हो तो पति नीच प्रकृति का होता है।
सुख योग : 1. बुध और शुक्र लग्न में हो तो कमनीय देह वाली , कला युक्त, बुध्हिमान और पति प्रिय होती है। 2. लग्न में बुध और चन्द्र के होने से चतुर, गुणवान, सुखी और सौभाग्यवती होती है। 3. लग्न में चन्द्र और शुक्र के होने से रूपवती , सुखी परन्तु ईर्ष्यालु होती है। 4. केंद्र स्थान के बलवान होने पर या फिर चन्द्र,, गुरु और बुध इनमे से कोई 2 गृह के उच्च होने पर तथा लग्न, में वरिश, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर, मीन, होतो समाज्पूज्य स्त्री होती है। 5. सातवे स्थान में शुभ ग्रहों के होने से गुणवती, पति का स्नेह प्राप्त करने वाली और सौभाग्य शाली स्त्री होती है।
संतति योग : 1. सातवे स्थान में चन्द्र या बुध हो तो कन्याये अधिक होंगी। 2. सातवे स्थान में राहू हो तो अधिक से अधिक 2 पुत्रियाँ होंगी पुत्र होने में बढ़ा हो। 3. नवे स्थान में शुक्र होने से कन्या का योग बनता है। 4. सातवे स्थान में मंगल हो और उसपर शनि की दृष्टि हो अथवा सातवे स्थान में शनि , मंगल, एकत्र हो तो गर्भपात होता रहता है।
बंध्यापन के योग : 1. सूर्य और शनि के आठवे स्थान में होने से बंध्या होती है। 2. आठवे स्थान में बुध के होने से एक बार संतान होकर बंद हो जाती है।
तलाक योग : 1. सूर्य का सातवे स्थान में होना तलाक की संभावनाए बनता है। 2. सातवे स्थान में निर्बल ग्रहों के होने से और उनपर शुभ ग्रहों के होने से एक पति स्वर तलाक देने पर दुसरे विवाह के योग बनते है। 3. सातवे स्थान में शुभ और पाप दोनों गृह होने से पुनर्विवाह के योग बनते है। . विधवा योग : 1. जन्म कुंडली में सातवे स्थान में मंगल हो और उस पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो विधवा योग बनता है . ऐसी लड़कियों का विवाह बड़ी उम्र में करने पर दोष कम हो जाता है . 2. आयु भाव में या चंद्रमा से सातवे स्थान में या आठवे स्थान में कई पाप गृह हो तो विधवा योग होता है। 3. 8 या 12 स्थान में मेष या वृश्चिक राशि हो और उसमे पाप गृह के साथ राहू हो तो विधवा योग होता है। 4. लग्न और सातवे स्थान में पाप गृह होने से भी विधवा योग बनता है। 5. चन्द्रमा से सातवे , आठवे, और बारहवे स्थान में शनि , मंगल हो और उन्पर भी पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो विधवा योग अबंता है। 6. क्षीण या नीच का चन्द्र 6 या 8 स्थान में हो तो भी विधवा योग बनता है 7. 6 और 8 स्थान का स्वामी एक दुसरे के स्थान में हो और उन पर पाप ग्रहों की दिष्टि हो तो विधवा योग बनता है। 8. सप्तम का स्वामी अष्टम में और अष्टम का स्वामी सप्तम में हो और इनमे से किसी को पाप गृह देख रहा हो तो विधवा योग बनता है। *☠️🐍जय श्री महाकाल सरकार ☠️🐍*🪷* ▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ *♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।* *अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।* *हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।* *राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...* *👉कामना-भेद-बन्दी-मोक्ष* *👉वाद-विवाद(मुकदमे में) जय* *👉दबेयानष्ट-धनकी पुनः प्राप्ति*। *👉*वाणीस्तम्भन-मुख-मुद्रण* *👉*राजवशीकरण* *👉* शत्रुपराजय* *👉*नपुंसकतानाश/ पुनःपुरुषत्व-प्राप्ति* *👉 *भूतप्रेतबाधा नाश* *👉*सर्वसिद्धि* *👉 *सम्पूर्ण साफल्य हेतु, विशेष अनुष्ठान हेतु। संपर्क करें।* *♥️रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* ।। आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।। 🕉️📿🔥🌞🚩🔱🚩🔥🌞